Top Ad unit 728 × 90

साहित्य संगम वेबसाइट पर आपका स्वागत है !

LATEST UPDATE

साहित्य संगम

छंद (Chhand) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | परिभाषा, भेद और उदाहरण

 छंद (Chhand) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | परिभाषा, भेद और उदाहरण

छंद की परिभाषा (Definition of Chhand in Hindi)

जब अक्षरों की संख्या, मात्राओं की गणना, यति और गति के विशेष नियमों का पालन करके कविता लिखी जाती है तो उसे छंद कहते हैं।

👉 सरल शब्दों में —
“शब्दों को निश्चित मात्राओं और लय में बाँधना ही छंद है।”

  • छंद से कविता में ताल, लय, माधुर्य और रस उत्पन्न होते हैं।

  • छंदोमयी रचना = पद्य, छंदविहीन रचना = गद्य

  • छंद को काव्य की आत्मा कहा गया है।

वर्ण और मात्राएँ

छंद का आधार अक्षर और मात्राएँ हैं।

वर्ण के प्रकार

  1. हृस्व (लघु) – 1 मात्रा (जैसे – अ, इ, उ)

  2. दीर्घ (गुरु) – 2 मात्रा (जैसे – आ, ई, ऊ)

गुरु होने की स्थितियाँ (लघु → गुरु)

  • अनुस्वार या विसर्ग से युक्त

  • संयुक्त व्यंजन के पूर्व

  • उच्चारण में जोर पड़ने पर

लघु पढ़े जाने की स्थितियाँ (गुरु → लघु)

  • ‘ए’ और ‘ओ’ का ह्रस्व उच्चारण

  • काव्य की आवश्यकता अनुसार

👉 मात्रा केवल स्वर की गिनी जाती है, व्यंजन की नहीं।
उदाहरण: स्वास्थ्य = स् + व् + आ + स् + थ् + य् + अ → 3 मात्राएँ।

छंद के भेद (Types of Chhand in Hindi)

1. मात्रिक छंद

  • मात्राओं की गणना पर आधारित।

2. वर्णिक छंद

  • अक्षरों (वर्णों) की गणना पर आधारित।

  • दो प्रकार:

    • गणबद्ध (जैसे इन्द्रवज्रा, मंदाक्रान्ता)

    • मुक्तक (जैसे अनुष्टुप्)

3. लयात्मक छंद (कुछ आचार्य मानते हैं)

  • गीतों में प्रयुक्त।

छंद की उपश्रेणियाँ

  1. सम छंद – प्रत्येक चरण में बराबर मात्राएँ/वर्ण (चौपाई, वंशस्थ)

  2. अर्धसम छंद – दो-दो चरणों में बराबर (दोहा, वियोगिनी)

  3. विषम छंद – न सम, न अर्धसम (छप्पय, कुण्डलिया)

यति और गति

  • यति – छंद पढ़ते समय ठहराव।

  • गति – छंद पढ़ने की लय।

गण लक्षण रूप उदाहरण
म-गण तीनों गुरु ऽ ऽ ऽ मातारा
न-गण तीनों लघु नसल
भ-गण आदि गुरु ऽ।। मानस
ज-गण मध्य गुरु ।ऽ। जभान
स-गण अन्त्य गुरु ।।ऽ सलगा
य-गण आदि लघु ।ऽऽ यमाता
र-गण मध्य लघु ऽ।ऽ राजभा
त-गण अन्त्य लघु ऽऽ। ताराज

छंद मात्रा-योजना विशेषता उदाहरण
दोहा 13–11, 13–11 4 चरण, भक्ति/नीति काव्य साधु ऐसा चाहिए…
सोरठा 11–13, 11–13 दोहे का उल्टा बड़ा हुआ तो क्या हुआ…
चौपाई प्रत्येक चरण 16 मात्रा रामचरितमानस, हनुमान चालीसा जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…
रोला 24 (11+13) वीर रस, 2 चरण धरती सुनत हर्षाय…
मंदाक्रांता 17+17 करुण/श्रृंगार रस मेघदूत शैली
शिखरिणी 17+17 भक्तिपूर्ण काव्य संस्कृत प्रधान
वसंततिलका 14+14 वसंत वर्णन संस्कृत प्रधान
मालिनी 15+15 माधुर्ययुक्त मधुर रसयुक्त

छोटी ट्रिक (मात्रा-योजना याद रखने की)

  1. दोहा → 13–11, 13–11 → "तेरह-ग्यारह"
  2. सोरठा → 11–13, 11–13 → दोहे का उल्टा
  3. चौपाई → 16-16-16-16 → चार चौके = चौपाई
  4. रोला → 24 (11+13) → 24 का रोला
  5. मंदाक्रांता → 17+17 → मंद-मंद 17-17
  6. शिखरिणी → 17 → शिखर = ऊँचा
  7. वसंततिलका → 14+14 → वसंत = दो-दो 14
  8. मालिनी → 15+15 → माला = दो पंखुड़ी

निष्कर्ष

छंद हिन्दी साहित्य की आत्मा है।
दोहा, चौपाई, सोरठा और रोला सबसे लोकप्रिय हिन्दी छंद हैं, जबकि मालिनी, मंदाक्रांता, वसंततिलका और शिखरिणी संस्कृत से आए हैं। इनसे कविता में लय, माधुर्य, सौंदर्य और रस का संचार होता है।

छंद (Chhand) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | परिभाषा, भेद और उदाहरण Reviewed by साहित्य संगम on September 21, 2025 Rating: 5

No comments:

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.