रस (Rasa) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | नवरस (9 रस) विस्तार से
रस (Rasa) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | नवरस (9 रस) विस्तार से
रस की परिभाषा
जब किसी काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने पर हमारे हृदय में आनंद या विशेष भावानुभूति होती है, उसी को रस कहते हैं।
👉 सरल शब्दों में –
“भावों के आस्वादन से जो आनन्द प्राप्त होता है वही रस है।”
रस के मुख्य अंग (रस की उत्पत्ति के कारण)
भरतमुनि के अनुसार रस चार प्रमुख अंगों से बनता है –
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स्थायी भाव – मनुष्य के भीतर स्थायी रूप से रहने वाले भाव (जैसे रति, हर्ष, क्रोध)।
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विभाव – रस उत्पन्न करने वाले कारण।
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आलम्बन विभाव – नायक/नायिका
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उद्दीपन विभाव – वातावरण, ऋतु, स्थिति
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अनुभाव – भावों की बाहरी अभिव्यक्ति (हँसी, आँसू, अंगों की गति)।
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संचारी भाव – क्षणिक भाव जो स्थायी भाव की सहायता करते हैं (लज्जा, शंका, उत्साह)।
👉 इन चारों के संयोग से ही रस की उत्पत्ति होती है।
कहावत है –
“विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः।”
(अर्थात – विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।)
रसों के प्रकार (नवरस)
भरतमुनि ने 8 रस बताए थे। बाद में आचार्य अभिनवगुप्त और अन्य आचार्यों ने 9 रस (नवरस) माने।
1. श्रृंगार रस (प्रेम रस)
👉 स्थायी भाव – रति (प्रेम)
📖 उदाहरण:
“कहि न सके कछु प्रेम रस, राधा–मोहन मिलि।”
2. हास्य रस
👉 स्थायी भाव – हास (हँसी)
📖 उदाहरण:
“बालबुद्धि सब भये, हँसी छूटे मुख ले।”
3. करुण रस
👉 स्थायी भाव – शोक
📖 उदाहरण:
“अब ना बचिहैं प्राण, बिछुरत राम लखन।”
4. रौद्र रस
👉 स्थायी भाव – क्रोध
📖 उदाहरण:
“भीषण भये रघुपति, देखी लंका जरत।”
5. वीर रस
👉 स्थायी भाव – उत्साह
📖 उदाहरण:
“रण में सिंह समान, बढे अरि दल पर।”
6. भयानक रस
👉 स्थायी भाव – भय
📖 उदाहरण:
“जगह-जगह शव पड़े, गिद्ध मंडरावैं।”
7. बीभत्स रस
👉 स्थायी भाव – जुगुप्सा (घृणा)
📖 उदाहरण:
“रुधिर सनी देह, हाड़ टूटे भू पर।”
8. अद्भुत रस
👉 स्थायी भाव – विस्मय (आश्चर्य)
📖 उदाहरण:
“देख्यो जब गिरिधर को, धारण करत गिरी।”
9. शांत रस
👉 स्थायी भाव – शांति/शम
📖 उदाहरण:
“सबहि बिनय करि छाड़ि, ध्यान धरहु हरि नाम।”
नवरस का महत्व
नवरस साहित्य और कला का प्राण हैं। कवि, लेखक और कलाकार अपनी रचना में इन रसों को पिरोकर पाठकों/दर्शकों के हृदय में आनंद और भावाभिव्यक्ति जागृत करते हैं।

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