अलंकार (Alankar) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | परिभाषा, भेद और उदाहरण
अलंकार (Alankar) – कक्षा 11 हिन्दी साहित्य | परिभाषा, भेद और उदाहरण
अलंकार की परिभाषा (Definition of Alankar in Hindi)
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अलंकार = अलम् + कार
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अलम् = आभूषण, शोभा
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कार = करने वाला
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👉 “काव्य की शोभा बढ़ाने वाले विशेष शब्द या अर्थ के गुण को अलंकार कहते हैं।”
अलंकारों के भेद (Types of Alankar)
हिन्दी साहित्य में अलंकार तीन प्रकार के माने गए हैं –
| क्रम | प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | शब्दालंकार | शब्दों की सुंदरता और ध्वनि से शोभा | "रघुपति राघव राजा राम" |
| 2 | अर्थालंकार | अर्थ, भाव और कल्पना से शोभा | "मुख चन्द्र-सा" |
| 3 | उभयालंकार | शब्द और अर्थ दोनों से शोभा | "कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय" |
शब्दालंकार (Shabd Alankar)
जब भाषा की सुंदरता शब्दों की रचना, ध्वनि और पुनरावृत्ति से आती है।
1. अनुप्रास अलंकार
👉 किसी पंक्ति में एक ही वर्ण/ध्वनि की बार-बार पुनरावृत्ति।
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उदाहरण:
“चारु चंद्र की चंचल किरणें।” (यहाँ ‘च’ वर्ण की पुनरावृत्ति है।)
2. यमक अलंकार
👉 एक ही शब्द बार-बार आए, लेकिन अर्थ अलग-अलग हों।
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उदाहरण:
“राम राम सब जगत बखाने।” (पहला = भगवान का नाम, दूसरा = खुशी का भाव)
3. श्लेष अलंकार
👉 एक ही शब्द से अनेक अर्थ निकलें।
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उदाहरण:
“गया नामक नगर में गया।” (‘गया’ = नगर और ‘गया’ = जाना)
4. वक्रोक्ति अलंकार
👉 सीधी बात को व्यंग्य या घुमाकर कहना।
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उदाहरण:
“भला हो तुम्हारा! बहुत ‘कृपा’ की तुमने!”
अर्थालंकार (Arth Alankar)
जब भाषा की सुंदरता अर्थ, भाव और कल्पना से आती है।
1. उपमा अलंकार
👉 उपमेय (जिसकी तुलना हो रही है) और उपमान (जिससे तुलना हो रही है) के बीच स्पष्ट समानता।
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उदाहरण: “मुख चन्द्र-सा।”
2. रूपक अलंकार
👉 उपमेय और उपमान में भेद मिटा देना।
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उदाहरण: “उसका मुख चाँद है।”
3. मानवीकरण अलंकार (Personification)
👉 निर्जीव वस्तुओं को मानवीय रूप देना।
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उदाहरण: “पवन कहे कुछ कान में, फूल सुनें मुस्काय।”
4. अतिशयोक्ति अलंकार
👉 बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करना।
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उदाहरण: “तेरी हँसी से पूरी दुनिया रोशन हो जाती है।”
5. उत्प्रेक्षा अलंकार
👉 संभावना रूप में उपमा।
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उदाहरण: “नयन मानो कमल हों।”
6. अन्योक्ति अलंकार
👉 अप्रत्यक्ष रूप में कथन।
7. दृष्टांत अलंकार
👉 उदाहरण देकर किसी बात को स्पष्ट करना।
8. विभावना अलंकार
👉 असंभव को संभव दिखाना।
9. संदेह अलंकार
👉 जब उपमेय और उपमान में संदेह हो।
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उदाहरण: “यह चंद्रमा है या तेरे मुख का तेज?”
10. भ्रांतिमान अलंकार
👉 भ्रम के कारण किसी वस्तु को दूसरी वस्तु मान लेना।
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उदाहरण: “आकाश में खिले हुए फूल (तारे)।”
11. प्रतीप अलंकार
👉 उपमेय और उपमान का उल्टा प्रयोग।
12. विरोधाभास अलंकार
👉 विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास।
13. व्यतिरेक अलंकार
👉 जब उपमेय में उपमान से अधिक गुण दिखाए जाएँ।
14. समासोक्ति अलंकार
👉 बिना नाम लिए किसी का वर्णन करना।
उभयालंकार (Ubhay Alankar)
👉 जब काव्य में शब्द और अर्थ दोनों से सौंदर्य उत्पन्न हो।
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उदाहरण: “फूल हँसे, कलियाँ मुस्कुराई।”
अलंकारों का महत्व (Importance of Alankar in Hindi Poetry)
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कविता को सुंदर, रोचक और चमत्कारपूर्ण बनाते हैं।
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शब्द और अर्थ की दोहरी शोभा प्रदान करते हैं।
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पाठक और श्रोता के मन को आकर्षित करते हैं।
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काव्य की हृदयग्राहिता बढ़ाते हैं।
👉 “शब्द से ध्वनि की सुंदरता, अर्थ से भाव की सुंदरता।”
उपमेय और उपमान (Upameya & Upmaan)
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उपमेय = जिसकी तुलना की जा रही है।
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उपमान = जिससे तुलना की जा रही है।
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उदाहरण: “उसका चेहरा चाँद जैसा है।”
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चेहरा = उपमेय
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चाँद = उपमान
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निष्कर्ष
अलंकार काव्य के सौंदर्य का प्राण है।
शब्दालंकार (ध्वनि की शोभा), अर्थालंकार (भाव की शोभा) और उभयालंकार (दोनों की शोभा) से कविता रोचक और प्रभावशाली बनती है।

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