विशेष लेखन-स्वरूप और प्रकार कक्षा 12 ऐच्छिक अनिवार्य
विशेष लेखन-स्वरूप और प्रकार कक्षा
12 ऐच्छिक अनिवार्य
1. विशेष
लेखन क्या है?
- यह किसी विशिष्ट विषय पर सामान्य लेखन से अलग और गहराई से किया गया लेखन होता है।
- मीडिया संस्थानों में इसके लिए अलग डेस्क और विशेष संवाददाता होते हैं।
- यह विषय की बारीक समझ, गहन विश्लेषण और तकनीकी शब्दावली पर आधारित होता है।
विशेष
लेखन का अर्थ:
· विशेष लेखन ऐसा लेखन होता है जो किसी
विशेष उद्देश्य, माध्यम या विषय के अनुरूप लिखा जाता है। इसका प्रयोग सूचना
देने, विश्लेषण करने, मनोरंजन करने या किसी विषय पर जनमत
तैयार करने हेतु किया जाता है।
विशेष लेखन के प्रकार
1. सूचनात्मक लेखन: पाठकों को तथ्यात्मक या तथ्य आधारित जानकारी
देना। जैसे रिपोर्ट लेखन, या प्रेस विज्ञप्ति।
2. विश्लेषणात्मक लेखन/ विवेचनात्मक लेखन: किसी विषय का गहन विश्लेषण और
तर्कपूर्ण प्रस्तुति।
3. मनोरंजनात्मक लेखन: पाठकों या दर्शकों को रोचकता प्रदान
करना।
4. प्रेरणात्मक लेखन: पाठकों में सामाजिक या नैतिक मूल्यों
पर जागरूकता बढ़ाना।
5. प्रचारात्मक लेखन: विज्ञापन, सरकारी
योजना, सामाजिक संदेश या जागरूकता फैलाने वाला लेखन।
2. बीट
रिपोर्टिंग और विशेष लेखन में अंतर
3. विशेष
लेखन के अंतर्गत आने वाले प्रकार
·
रिपोर्टिंग
·
फीचर
लेख
·
टिप्पणी
·
साक्षात्कार
·
समीक्षा
·
स्तंभ
लेखन
4. भाषा और शैली
·
कोई
निश्चित शैली नहीं।
·
विषय
के अनुसार उलटा पिरामिड या कथात्मक
शैली।
·
तकनीकी
शब्दावली का प्रयोग (जैसे आर्थिक, पर्यावरणीय, खेल
संबंधी)।
·
लेखन सटीक, स्पष्ट
और रोचक होना चाहिए।
5. विशेष
लेखन के प्रमुख क्षेत्र
·
अर्थ-व्यापार
·
खेल
·
विज्ञान-प्रौद्योगिकी
·
कृषि
·
पर्यावरण
·
स्वास्थ्य
·
शिक्षा
·
विदेश
नीति
·
रक्षा
·
फ़िल्म
और मनोरंजन
·
अपराध
·
कानून
·
सामाजिक
मुद्दे
6. विशेषज्ञता
कैसे हासिल करें
·
विषय
में रुचि होनी चाहिए।
·
उस
क्षेत्र में पढ़ाई, निरंतर अध्ययन, पुस्तकें पढ़ना, लेख
संग्रह करना।
·
तकनीकी
शब्दावली, आँकड़े, और प्रोफेशनल नेटवर्क बनाना।
·
सरकारी/गैरसरकारी
संगठनों से संपर्क व जानकारी रखना।
7. उदाहरण – आर्थिक
और खेल लेखन
आर्थिक लेखन:
·
विषय
कठिन व तकनीकी होता है।
·
लेखक
को "मुद्रास्फीति", "ब्याज दर", "घाटा", आदि
शब्दों की जानकारी होनी चाहिए।
·
पाठकों
को सरल भाषा में समझाना होता है।
खेल लेखन:
·
जोश, रोमांच
और ऊर्जा से भरपूर शैली।
·
खेल
नियमों, तकनीकों, कीर्तिमानों की जानकारी आवश्यक।
·
विश्लेषण
भी रोचक और घटना-आधारित होना चाहिए।
8. विशेष
लेखन की विशेषताएँ
·
विश्लेषणात्मक
और संदर्भात्मक होता है।
·
तकनीकी
जानकारी और शब्दावली से युक्त होता है।
·
पाठकों
की रुचि, पृष्ठभूमि और समझ को ध्यान में रखकर लिखा जाता है।
·
इसे
पत्रकार, विशेषज्ञ और फ्रीलांस लेखक भी कर सकते हैं।
·
विषय
के अनुसार शैली का चयन
·
भाषा
सटीक, स्पष्ट और उद्देश्यपरक
·
पाठक
या दर्शक के अनुरूप प्रस्तुति
·
तथ्यों
की सत्यता और प्रस्तुति में सृजनात्मकता
·
अनुशासनबद्ध
और क्रमिक ढंग से लेखन
महत्त्व:
·
पत्रकारिता
और जनसंचार के क्षेत्र में उपयोगी
·
पाठक
को प्रभावित करने में सक्षम
·
सामाजिक
जागरूकता और जनमत निर्माण का माध्यम
विशेष लेखन के स्वरूप (Formats of
Special Writing):
1.
रिपोर्ट (Report): किसी घटना, सम्मेलन, समारोह आदि की औपचारिक सूचना।
2. साक्षात्कार (Interview):
किसी व्यक्ति से लिए गए प्रश्नोत्तर के रूप में संवाद।
3.
फीचर लेखन (Feature Writing): सामान्य विषयों को रोचक, भावनात्मक शैली में प्रस्तुत
करना।
4. संपादकीय (Editorial):
किसी ज्वलंत मुद्दे
पर समाचारपत्र या संपादक का दृष्टिकोण।
5.
रिपोर्ताज (Reportage): घटनास्थल का आँखों देखा हाल, विवरणात्मक शैली में।
6. समीक्षा (आलोचना) (Critique/Review): फ़िल्म, नाटक, पुस्तक,आदि की विवेचनात्मक
प्रस्तुति।
7.
रेडियो/टीवी
स्क्रिप्ट लेखन (Broadcast Writing):
श्रव्य/दृश्य माध्यमों के लिए संवादात्मक लेखन।
8.
प्रेस विज्ञप्ति (Press
Release): सरकारी या संस्था द्वारा मीडिया को दी
गई आधिकारिक सूचना।
9.
पत्र
लेखन (Formal Letter Writing): औपचारिक
पत्र – प्रशासनिक या व्यावसायिक उद्देश्यों हेतु पत्र आवेदन पत्र, शिकायत पत्र आदि।
10. कॉलम लेखन (Column Writing):किसी स्तंभ में नियमित प्रकाशित लेख, लेखक की स्वतंत्र शैली में।
11. विज्ञापन लेखन (Advertisement Copy):उत्पाद या सेवा के प्रचार हेतु रचनात्मक और आकर्षक
भाषा में लिखा गया लेख।
12. ब्लॉग/डिजिटल कंटेंट लेखन:इंटरनेट पर प्रकाशित विषयगत लेख, सूचनात्मक या व्यक्तिगत दृष्टिकोण से।
13. विश्लेषणात्मक लेख (Analytical Article):किसी मुद्दे का गहराई से विश्लेषण, कारण
और प्रभाव का विवेचन।

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