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जनसंचार माध्यम कक्षा 11 ऐच्छिक अनिवार्य

 

जनसंचार माध्यम कक्षा 11 ऐच्छिक अनिवार्य

  • “मीडिया जब तक जनता को साथ लेकर नहीं चलेगी तब तक जनता भी उसका साथ नहीं देगी”प्रभाष जोशी
  • संचार को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि संचार दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान है।
  • मानव सभ्यता के विकास में संचार की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • संचार के कई प्रकार हैं जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा अंतःवैयक्तिक, अंतरवैयक्तिक, समूह संचार और जनसंचार प्रमुख हैं।
  • संचार-परिभाषा और महत्त्व
  • संचार यानी संदेशों का आदान-प्रदान।
  • अकेलेपन और सोने के समय को छोड़ दिया जाए तो हम-सभी अपने  अधिकांश समय में अपनी छोटी-छोटी ज़रूरतों को पूरा करने या अपनी भावनाओं और विचारों को प्रकट करने के लिए एक-दूसरे से या समूह में बातचीत या संचार करने में लगा देते हैं।
  • यहाँ तक कि एक बच्चा भी संचार के बिना नहीं रह सकता।
  • वह रोकर या चिल्लाकर अपनी माँ का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

संचार क्रांति क्या है?

  • संचार और जनसंचार के विभिन्न माध्यमों-टेलीफोन, इंटरनेट, फैक्स, समाचारपत्र, रेडियो, टेलीविज़न और सिनेमा आदि के ज़रिये मनुष्य संदेशों के आदान-प्रदान में एक-दूसरे के बीच की दूरी और समय को लगातार कम से कम करने की कोशिश कर रहा है।
  • दुनिया के किसी भी कोने में कोई घटना हो, जनसंचार माध्यमों के ज़रिये कुछ ही मिनटों में हमें सभी खबर मिल जाती है।
  • अगर उस घटना वाले स्थल पर कोई टेलीविज़न समाचार चैनल का संवाददाता मौजूद हो तो हमें वहाँ की तसवीरें भी तुरंत देखने को मिल जाती हैं।
  • याद कीजिए 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमले को पूरी दुनिया ने अपनी आँखों के सामने घटते देखा। एक और उदाहरण के तौर पर आप क्रिकेट मैच देखने स्टेडियम भले न जा पाएँ लेकिन आप घर बैठे उस मैच का सीधा प्रसारण (लाइव) देख सकते हैं।
  • जनसंचार हमारे लिए न सिर्फ सूचना के माध्यम हैं बल्कि वे हमें जागरूक बनाने और हमारा मनोरंजन करने में भी सबसे अहम् भूमिका निभा रहे हैं।

 

संचार क्या है?

  • संचारशब्द की उत्पत्ति चरधातु से हुई है, जिसका अर्थ है चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना।
  • संचार से हमारा तात्पर्य दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान है।
  • संचार-परिभाषा मशहूर संचार शास्त्री विल्बर श्रेम  के अनुसार “संचार अनुभवों की साझेदारी है”
  • सूचनाओं, विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य-श्रव्य माध्यमों के ज़रिये सफलतापूर्वक एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना ही संचार है और इस प्रक्रिया को अंजाम देने में मदद करने वाले तरीके संचार माध्यम कहलाते हैं।
  • संचार एक घटना के बजाए प्रक्रिया है।
  • इस अर्थ में संचार अंतर्क्रियात्मक प्रक्रिया है।

 

संचार के तत्त्व

  • संचार एक प्रक्रिया है, इस प्रक्रिया में कई चरण या तत्त्व शामिल हैं।

संचार के विभिन्न तत्व

स्रोत /प्रेषक:- वह व्यक्ति है जो अपने विचारों को दूसरे व्यक्ति को भेजता है।

संचार प्रक्रिया की शुरुआत स्रोत या संचारक से होती है।

कुटीकृत /एन्कोडिंग:- संदेश की भाषा का ज्ञान संचारकर्ता व प्राप्तकर्ता दोनों को होना चाहिए।

संचार की प्रक्रिया का दूसरा चरण भाषा है।

भाषा असल में, एक तरह का कूट चिह्न या कोड है।

संदेश:-  सफल संचार के लिए संदेश का स्पष्ट और सीधा होना आवश्यक है।

जब स्रोत या संचारक एक उद्देश्य के साथ अपने किसी विचार, संदेश या भावना को किसी और तक पहुँचाना चाहता है तो संचार-प्रक्रिया की शुरुआत होती है।

संदेश जितना स्पष्ट और सीधा होगा, संदेश प्राप्त करने वाले के लिए उसे समझना उतना ही आसान होगा।

प्राप्तकर्ता यानी रिसीवर:- प्राप्तकर्ता यानी रिसीवर प्राप्त संदेश का कटवाचन यानी उसकी डीकोडिंग करता है।

संचार-प्रक्रिया में प्राप्तकर्ता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि वही संदेश का आखिरी लक्ष्य होता है। प्राप्तकर्ता कोई एक व्यक्ति, एक समूह या कोई संस्था अथवा एक विशाल जनसमूह भी हो सकता है।

डिकोडिंग:-इसका अर्थ है प्राप्त संदेश में निहित अर्थ को समझना

फीडबैक /प्रतिपुष्टि:-यह रिसीवर द्वारा प्रतिक्रिया है। यह संचार प्रक्रिया के पूरा होने का संकेत है।

वह प्रतिक्रिया सकारात्मक या नकारात्मक दोनों ही तरह की हो सकती है।

शोर:- यह संचार की प्रक्रिया में आने वाली रूकावटे /बाधा शोर कहलाती है

माध्यम:- (चेनल) -संदेश को किस माध्यम –टेलीफोन,समाचार पत्र,रेडियो ,इन्टरनेट से प्राप्त कर्ता तक पहुचाया जाता है

मीडिया:- टेलीफ़ोन, समाचारपत्र, रेडियो, टेलीविज़न, इंटरनेट और फ़िल्म आदि विभिन्न माध्यमों के ज़रिये भी संदेश प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है। 


संचार के  प्रकार

  • संचार प्रक्रिया में शामिल लोगों की संख्या के आधार पर संचार मुख्यत: चार प्रकार का होता है :-
  • अंत: वैयक्तिक संचार
  • अंतर वैयक्तिक संचार
  • समूह संचार
  • जनसंचार

अंत: वैयक्तिक संचार: यह संचार की वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति खुद से संचार करता है अथार्त इस प्रक्रिया में संचारक और प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति है। दरअसल यह एक मनोवैज्ञानिक क्रिया है जिसमें मानव व्यक्तिगत चिंतन-मनन करता है।

जैसे – पूजा ,इबादत/प्रार्थना करते समय ध्यान में होते है तब अंत: वैयक्तिक संचार होता है

अंतर वैयक्तिक संचार:- संचार की वह प्रक्रिया जिसमें दो  व्यक्ति आपस में आमने –सामने भावनाओं और विचारों का आदान प्रदान करते हैं तो उसे अंतरवैयक्तिक संचार कहते हैं।

समूह संचार:- नाम से ही स्पष्ट है कि वह संचार जो समूह में किया जाता है समूह संचार कहलाता है। क्लासरूम में पढ़ाई, एक साथ किसी बात पर हंसना, कवि सम्मेलन, भाषण यह सब समूह संचार का ही उदाहरण है।

जनसंचार:- जनसंचार दो शब्दों से मिलकर बना है। जन+संचार के योग से हुआ है। जन का अर्थ भीड़ होता है। समूह संचार का वृहद रूप है- जनसंचार। 

जनसंचार को अंग्रेजी भाषा Mass Communication कहते हैं, जिसका अभिप्राय बिखरी हुई जनता तक संचार माध्यमों की मदद से सूचना को पहुंचाना है। समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडियो, सिनेमा, केबल, इंटरनेट, वेब पोर्टल्स इत्यादि अत्याधुनिक संचार माध्यम हैं। जनसंचार का अर्थ विशाल जनसमूह के साथ संचार करने से है।

जनसंचार की विशेषताएँ

  • जनसंचार के श्रोताओं, पाठकों और दर्शकों की संख्या बहुत अधिक होती है।
  • पाठकों और दर्शकों का गठन पंचमेल होता है। जैसे किसी टेलीविज़न चैनल के दर्शकों में अमीर वर्ग भी हो सकता है और गरीब वर्ग भी, शहरी भी और ग्रामीण भी, पुरुष भी और महिला भी, युवा तथा वृद्ध भी।
  • सभी एक ही समय टी.वी. पर अपनी पसंद का कार्यक्रम देख रहे हो सकते हैं।
  • जनसंचार माध्यमों के ज़रिये प्रकाशित या प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि अंतरवैयक्तिक या समूह संचार की तुलना में जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
  • जनसंचार संचारक और प्राप्तकर्ता के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता है।
  • जनसंचार के लिए एक औपचारिक संगठन की भी ज़रूरत पड़ती है। उदाहरण के तौर पर समाचारपत्र किसी न किसी संगठन से प्रकाशित होता है या रेडियो का प्रसारण किसी रेडियो संगठन की ओर से किया जाता है।
  • जनसंचार माध्यमों में कई सारे द्वारपाल काम करते हैं।
  • किसी जनसंचार माध्यम में काम करने वाले द्वारपाल ही तय करते हैं कि वहाँ किस तरह की सामग्री प्रकाशित या प्रसारित की जाएगी।

संचार के कार्य

  • संचार विशेषज्ञों के अनुसार संचार के कई कार्य हैं। इनमें निम्नलिखित हैं
  • नियंत्रण संचार के ज़रिये हम किसी के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जैसे कक्षा में शिक्षक विद्यार्थियों को नियंत्रित करते हैं।
  • सूचना किसी से कुछ जानने के लिए या कुछ बताने के लिए भी हम संचार का प्रयोग करते हैं।
  • अभिव्यक्ति संचार का उपयोग हम अपनी भावनाओं के स्पष्टीकरण के लिए या अपने आप को एक खास तरह से प्रस्तुत करने के लिए भी करते हैं।
  • सामाजिक संपर्क संचार का प्रयोग हम किसी व्यक्ति, किसी समूह या किसी संस्था में अपने संपर्कों को बढ़ाने के लिए भी करते हैं।
  • संचार का प्रयोग अकसर समस्याओं या किसी चिंता को दूर करने के लिए किया जाता हैं।
  • प्रतिक्रिया संचार का प्रयोग हम अपनी पसंद या न पसंद की किसी वस्तु या विषय के प्रति प्रतिकार प्रकट करने के लिए भी करते हैं।

 

जनसंचार के कार्य

सूचना देना /सूचित करना : एक जमाना था, जब कहा जाता था- Knowledge is Power -ज्ञान ही शक्ति है, लेकिन आज कहा जाता है- The Information is Power-सूचना ही शक्ति है। जनसंचार माध्यमो का प्रमुख कार्य सूचना देना ।

शिक्षित करना : संचार का दूसरा प्रमुख कार्य शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर समाज के लोगों को शिक्षित करना है। समाज को शिक्षित करने का उद्देश्य मात्र पढऩा-लिखना नहीं है, बल्कि देश व समाज में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देकर उपयोग करने योग्य  बनाना है।

मनोरंजन करना : संचार माध्यमों का तीसरा प्रमुख कार्य लोगों का मनोरंजन करना है। वर्तमान समय में सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, इंटरनेट जैसे माध्यम लोगों के समक्ष मनोरंजनात्मक सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं।

एजेंडा तय करना : सूचनाओ और विचारों के जरिये किसी देश और समाज का एजेंडा तय करते है ।

निगरानी  करना : सरकार और संस्थाओ के कामकाज पर निगरानी रखना और अनियमितताओं को लोगों के सामने लाने की जिम्मेदारी जनसंचार माध्यमों पर है ।

विचार विमर्श के मंच : लोकतंत्र में विभिन्न विचारों को अभिव्यक्ति का मंच उपलब्ध कराते है ।

 

भारत में जनसंचार माध्यमों का विकास

  • भारत के मौजूदा जनसंचार के आधुनिक माध्यमों की प्रेरणा भले ही पश्चिमी जनसंचार माध्यम रहे हों, परन्तु हमारे देश के जनसंचार माध्यमों का इतिहास भी बहुत पुराना हैं।
  • देवर्षि नारद को भारत का पहला समाचार वाचक माना जाता है जो वीणा की मधुर झंकार के साथ धरती और देवलोक के बीच संवाद-सेतु थे।
  • महाभारत काल में महाराज धृतराष्ट्र और रानी गांधारी को युद्ध की झलक दिखाने और उसका विस्तार पूर्वक विवरण सुनाने के लिए जिस तरह संजय की परिकल्पना की गई है, वह एक बहुत ही समृद्ध संचार व्यवस्था की ओर इशारा करती है।
  • चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक जैसे सम्राटों के शासन-काल में स्थायी महत्त्व के संदेशों के लिए शिलालेखों और समयानुसार या तुरंत भेजे जाने वाले संदेशों के लिए कच्ची स्याही या रंगों से संदेश लिखकर प्रकट करने की व्यवस्था और मजबूत हुई।
  • देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित विभिन्न नाट्यरूपों-कथावाचन, बाउल, सांग, रागनी, तमाशा, लावनी, नौटंकी, जात्रा, गंगा-गौरी, यक्षगान आदि का विशेष महत्त्व है।
  • जनसंचार के आधुनिक माध्यमों के रूप चाहे समाचारपत्र हों या रेडियो, टेलीविज़न या इंटरनेट, सभी माध्यम पश्चिम से ही आए और हमने शुरुआत में उन्हें उसी रूप में अपनाया लेकिन धीरे-धीरे वे हमारी सांस्कृतिक विरासत के अंग बनते चले गए।
  • इसलिए आज के जनसंचार माध्यमों का ढाँचा भले पश्चिमी हो, लेकिन उनकी विषयवस्तु और रंगरूप भारतीय ही हैं।
  • जनसंचार माध्यमों के वर्तमान प्रचलित रूपों में समाचारपत्र-पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा और इंटरनेट आदि प्रमुख हैं।  

समाचारपत्र-पत्रिकाएँ

  • पत्र-पत्रिकाएँ या प्रिंट मीडिया को जनसंचार की सबसे मज़बूत कड़ी कहा जाता है।
  • आज भले ही प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न या इंटरनेट, सभी को पत्रकारिता के अंतर्गत रखा जाता हो, लेकिन शुरुआत में सिर्फ़ प्रिंट माध्यमों के ज़रिये खबरों के आदान-प्रदान को ही पत्रकारिता कहा जाता था।
  • पत्रकारिता के तीन पहलू हैं-पहला समाचारों को इकठ्ठा करना, दूसरा उन्हें संपादित कर छपने लायक बनाना और तीसरा पत्र या पत्रिका के रूप में छापकर पाठक तक पहुँचाना।
  • दुनिया में अखबारी पत्रकारिता को अस्तित्व में आए 400 साल हो गए हैं
  • भारतीय समाचार पत्र बंगाल गजट कलकत्ता से अंग्रजी में जेम्स अगस्टन हिक्की ने 29 जनवरी 1780 में पहला निकाला। इसका आदर्श वाक्य था - सभी के लिये खुला फिर भी किसी से प्रभावित नहीं
  • पहला भारतीय समाचार पत्र अंग्रेज़ी में 1816 ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला गया।
  • भारत में प्रकाशित होने वाला पहला हिंदी भाषा का पहला साप्ताहिक  समाचार पत्र - उदंत मार्तंड (द राइजिंग सन), 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल के सम्पादन में कलकत्ता से प्रकाशित शुरू हुआ।
  • 30 मई को "हिंदी पत्रकारिता दिवस" के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसने हिंदी भाषा में पत्रकारिता की शुरुआत को चिह्नित किया था।
  • गाँधी जी को समकालीन भारत का सबसे बड़ा पत्रकार
  • स्वतन्त्रता पूर्व के पत्रकारों में गणेश शंकर विद्यार्थी ,माखनलाल चतुर्वेदी,प्रतापनारायण मिश्र ,शिवपूजन सहाय,रामवृक्ष बेनीपुरी और बालमुकुन्द गुप्त
  • प्रमुख पत्रिकाए –केसरी ,हिंदुस्तान ,सरस्वती ,हंस ,कर्मवीर ,प्रताप ,प्रदीप ,और विशाल भारत
  • आजादी के बाद प्रमुख पत्रकार –अज्ञेय ,रघुवीर सहाय ,धर्मवीर भारती ,मनोहर श्याम जोशी .राजेंद्र माथुर
  • समाचार पत्र –नवभारत टाइम्स ,जनसत्ता ,नई दुनिया ,अमर उजाला ,दैनिक जागरण
  • पत्रिकाएँ –धर्मयुग,दिनमान,इन्डिया-टुडे

 

रेडियो ( विभिन्न माध्यम )

  • रेडियो जनसंचार का श्रव्य माध्यम है।
  • रेडियो में  ध्वनि , शब्द और स्वर ही प्रमुख हैं।
  • रेडियो मूलतः एक रेखीय (लीनियर) माध्यम है।
  • 1895  में इटली के इंजीनियर जी. मार्कोनी ने वायरलेस की खोज की ।
  • 1921 मुंबई में टाइम्स ऑफ़ इन्डिया डाक तार विभाग की और से पहला  संगीत कार्यक्रम प्रसारित किया ।
  • 1936 में ऑल इन्डिया रेडियो की विधिवत स्थापना हुई ।
  • रेडियो समाचार की  संरचना समाचार पत्रों तथा टीवी की तरह उल्टा पिरामिड शैली पर आधारित होती है।
  • आजादी के समय तक कुल नो रेडियो स्टेशन –लखनऊ,दिल्ली,मुंबई,कलकता,मद्रास,तिरुचिरापल्ली,ढाका,लाहोर,पेशावर।
  • वर्तमान में आकाशवाणी देश की 24 भाषाओं और 146 बोलियों में कार्यक्रम प्रस्तुत करती है ।
  • 1993 में FM - Frequency modulation की शुरुवात (फ्रीकवेंशी मोड्यूलेशन )
  • 1997 में आकाशवाणी और दूरदर्शन को केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण से निकालकर प्रसार भारती नाम के स्वायतशासी निकाय को सोंप दिया ।
  • रेडियो की तात्कालिक ,घनिष्टता और प्रभाव के कारण गाँधी जी ने रेडियो को एक अद्भुत शक्ति कहा था
  • जिसमें अखबार की तरह पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं होती ।

 

टेलीविजन ( विभिन्न माध्यम )

  • टेलीविजन जनसंचार का दृश्य-श्रव्य माध्यम है।
  • यह रेडियो की भांति एक रेखीय माध्यम है।
  • जनसंचार का सबसे लोकप्रिय और ताकतवर माध्यम
  • टेलीविजन में शब्दों व ध्वनियों की अपेक्षा दृश्यों का सर्वाधिक महत्व होता है।
  • आविष्कार1927 में जॉन लोगी बेयर्ड
  • 1936 में BBC ने अपनी टेलीविजन सेवा प्रारम्भ की
  • भारत में टेलीविजन की शुरुवात 15 सितम्बर 1959 को यूनेस्को की एक शैक्षिक परियोजना के तहत  हुई जिसका उद्देश्य शिक्षा के सामुदायिक विकाश को प्रोत्साहित करना था
  • 15 अगस्त 1965 स्वतन्त्रता दिवस से विधिवत TV सेवा प्रारम्भ हुई
  • 1 अप्रैल 1976 से इसे आकाशवाणी से अलग कर दूरदर्शन नाम दिया गया
  • 1984 में टेलीविजन सेवा की रजत जयंती मनाई गई
  • दूरदर्शन का उद्देश्य-समाज में जहाँ पुराने मूल्य टूट रहे हो और नए न बन रहे हो वहाँ दूरदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जनतंत्र को मजबूत बना सकता है ।

 

सिनेमा :-

  • जनसंचार का सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली माध्यम सिनेमा है।
  • आविष्कार –थोमस अल्वा एडिसन 1883 ई.
  • भले ही यह जनसंचार के अन्य माध्यमों की तरह सीधे तौर पर सूचना देने का काम नहीं करता लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से सूचना, ज्ञान और संदेश देने का काम करता है।
  • 1883 ई. फ़्रांस में पहली फिल्म बनी –“द अराइवल ऑफ़ ट्रेन
  • भारत में पहली मूक फिल्म बनाने का श्रेय –दादा साहब फाल्के को
  • फिल्म का नाम –“राजा हरिशचंद्र” 1913 ई.
  • 1931 ई.में पहली बोलती फिल्म –“आलम आरा”
  • पचास के दशक में “पथेर पांचाली”-सत्यजीत रॉय

 

इंटरनेट ( विभिन्न माध्यम ):-  महत्वपूर्ण तथ्य :-

  • इसे ऑनलाइन पत्रकारिता /साइबर पत्रकारिता/वेब पत्रकारिता
  • इंटरनेट पर समाचार पत्र का प्रकाशन अथवा खबर का आदान-प्रदान ही वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता है।
  • इन्टरनेट जनसंचार का सबसे आधुनिक और लोकप्रिय माध्यम है ।
  • इन्टरनेट एक अन्तक्रियात्मक माध्यम है
  • यानि आप मूकदर्शक नही है ,आप सवाल –जवाब बहस में भाग ले सकते है ।
  • इंटरनेट पत्रकारिता का पहला दोर-1982 से 1992 तक
  • इंटरनेट पत्रकारिता का दूसरा  दोर-1993 से 2001 तक
  • तीसरे दोर की इंटरनेट पत्रकारिता 2002 से अब तक की है
  • इंटरनेट पत्रकारिता की शुरुआत -1983 से 2002 के बीच 
  • भारत के लिए प्रथम दौर 1993 से प्रारंभ माना जाता है और दूसरा दौर 2003 से माना जाता है।
  • नई वेब भाषा HTML -Hypertext Markup Language
  • इन्टरनेट एक्स्प्लोरर और नेट्स्केप नाम के ब्राउजर क्रोम मोजिला  –जिसके जरिये विश्वव्यापी जाल में गोते लगाये जा सकते है
  • न्यू मीडिया के नाम पर डॉट कॉम कम्पनियों का उफान आया है
  • भारत में सच्चे अर्थों में यदि कोई भी पत्रकारिता कर रहा है तो वह rediff.com , इंडिया इन्फोलाइन , तथा सीफी जैसी कुछ साईट हैं।
  • रेडिफ को भारत की पहली साइट कहा जा सकता है।
  • वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता करने का श्रेय तहलका डॉट कॉम को जाता है।
  • हिंदी में नेट पत्रकारिता वेबदुनिया के साथ प्रारंभ हुई।
  • इंदौर के नई दुनिया समूह से प्रारंभ हुआ यह पोर्टल हिंदी का संपूर्ण पोर्टल है। -वेब दुनिया
  • पत्रकारिता की दृष्टि से टाइम्स ऑफ़ इंडिया , हिंदुस्तान टाइम्स ,इंडियन एक्सप्रेस ,ट्रीब्यून,स्टेटसमेन,पायनियर,NDTV,IBN, Z-NEWS, आजतक और आउट लुक  एवं राष्ट्रीय सहारा के वेब संस्करण प्रारंभ हुए।
  • इन्डिया टुडे जैसी साईट को भुगतान के बाद देखा जा सकता है
  • नियमित अपडेट वाली साईट –हिन्दू , टाइम्स ऑफ़ इंडिया, आउट लुक, NDTV, Z-NEWS,आजतक 
  • प्रभासाक्षी नाम से प्रारंभ हुआ अखबार प्रिंट रूप में ना होकर केवल इंटरनेट पर उपलब्ध है।
  • आज पत्रकारिता के अनुसार श्रेष्ठ साइट बी.बी.सी. है
  • कुल मिलाकर हिंदी की वेब पत्रकारिता अभी अपने शैशव काल में ही है।
  • इन्टरनेट के द्वारा जहां हम सूचना , मनोरंजन , ज्ञान तथा निजी व सार्वजनिक संवादों का आदानप्रदान कर सकते हैं। वहीं इसे अश्लील,दुष्प्रचार एवं गंदगी फैलाने का माध्यम भी बनाया जा रहा है। 
  • इंटरनेट का प्रयोग समाचारों के संप्रेषण संकलन तथा सत्यापन एवं पुष्टिकरण में भी किया जा रहा है।
  • टेलीप्रिंटर के जमाने में जहां 1 मिनट में केवल 80 शब्द एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जा सकते थे।
  • वही आज एक सेकंड में लगभग 70000 शब्द भेजे जा सकते हैं।

 

हिंदी नेट संसार

  • हिंदी में नेट पत्रकारिता वेब दुनियाके साथ शुरू हुई।
  • इंदौर के नई दुनिया समूह से शुरू हुआ यह पोर्टल हिंदी का संपूर्ण पोर्टल है।
  • हिंदी वेब पत्रकारिता में प्रमुख समस्या हिंदी के फॉन्ट की है।
  • अभी कोई की बोर्डहिंदी में नहीं बना है।
  • डायनमिक फॉन्ट की अनुपलब्धता के कारण हिंदी की अधिकतर साइटें नहीं खुलती।
  • माइक्रोसॉफ्ट और वेबदुनिय यूनिकोड फॉण्ट बनाए है
  • जब तक हिंदी के कीबोर्ड का मानकीकरण नहीं हो जाता तब तक इस समस्या को दूर नहीं किया जा सकता।

जनसंचार माध्यमों का प्रभाव

  • हमारी जीवनशैली पर संचार माध्यमों का बहुत असर पड़ा है।
  • आज के संचार प्रधान समाज में जनसंचार माध्यमों के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।
  • खरीदारी-बिक्री के हमारे फ़ैसलों पर भी विज्ञापनों का असर साफ़ देखा जा सकता है।
  • यहाँ तक कि शादी-ब्याह के लिए भी लोगों की अखबार या इंटरनेट के मैट्रिमोनियल पर निर्भरता बढ़ने लगी है।
  • टिकट बुक कराने, अपनी सेहत से लेकर धर्म-आध्यात्म तक के बारे में जानकारी और टेलीफ़ोन का बिल जमा कराने से लेकर सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है।
  • जनसंचार माध्यम आज हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं और हम उन्हें चाहते हुए भी रोक नहीं सकते। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जनसंचार माध्यमों ने हमारे जीवन को और ज़्यादा सरल हमारी क्षमताओं को और ज्यादा समर्थ, हमारे सामाजिक जीवन को और अधिक सक्रिय बनाया है।
  • हाल के वर्षों में स्टिंग आपरेशन के ज़रिये सामने आया तहलका कांड हो या ऑपरेशन दुर्योधनया चक्रव्यूह’, सबने यही साबित किया है कि यदि चाहे तो जनसंचार माध्यम सत्ता के शिखर को भी हिला सकते हैं।
  • सकारात्मक प्रभावों के साथ साथ जनसंचार माध्यमों के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं।
  • अगर सावधानी से इसका इस्तेमाल न किया जाए तो लोगों पर इसका बहुत बुरा प्रभाव भी पड़ता है।
  • सिनेमा और टी.वी. जैसे जनसंचार माध्यम काल्पनिक और लुभावनी कथाओं के ज़रिये लोगों को एक नकली दुनिया में पहुँचा देते हैं जिसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं होता है।
  • जनसंचार माध्यमों खासकर सिनेमा पर यह आरोप भी लगता रहा है कि उन्होंने समाज में हिंसा, अश्लीलता और असामाजिक व्यवहार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • परन्तु विशेषज्ञों का यह मानना है कि जनसंचार माध्यमों का लोगों पर उतना वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा जितना कि उसके बारे में समझा जाता है।
जनसंचार माध्यमों के प्रभाव को लेकर कुछ धारणाएँ इस प्रकार हैं-
  • जनसंचार माध्यम लोगों के व्यवहार और आदतों में परिवर्तन नहीं करते बल्कि उनमें थोड़ा-बहुत फेरबदल और उन्हें और ज़्यादा मज़बूत करने का काम करते हैं।
  • जनसंचार माध्यमों का प्रभाव तब और अधिक बढ़ जाता है जब लगभग सारे माध्यम एक ही समय में एक ही बात कहने लगते हैं।
  • जब सभी माध्यम कई मुद्दों के बजाय किसी एक मुद्दे को बहुत अधिक उछालने लगते हैं और बार-बार उन्हीं संदेशों, छवियों, विचारों को दोहराने लगते हैं, तब भी उनका गहरा प्रभाव पड़ता है।
  • अखबारों और टेलीविज़न चैनलों में किसी खास खबर या मुद्दे को ज़रूरत से ज़्यादा उछाला जाता है और कुछ अन्य मुद्दों और खबरों को बिलकुल जगह नहीं मिलती है।
जनसंचार माध्यमों नियंत्रण ?
  • जनसंचार माध्यमों का संबंध सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है।
  • उनसे यह उम्मीद  की जाती है कि वे सार्वजनिक हित को आगे बढ़ाएँगे लेकिन यह एक तथ्य है कि अधिकांश जनसंचार माध्यमों पर कंपनियों या व्यक्तियों का अधिकार है।
  • वे उन्हें सार्वजनिक हित से ज़्यादा अपने व्यावसायिक मुनाफ़े को ध्यान में रखकर संचालित करते हैं।
  • इसके लिए तथ्यों के साथ तोड़-मरोड़ और सच्चाई को छुपाने की कोशिश की जाती है।
  • खासकर बच्चों और युवाओं पर जनसंचार माध्यमों के ज़रिये प्रस्तुत की जा रही आधुनिक व् पश्चिमी जीवनशैली का गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
  • जनसंचार माध्यमों ने जहाँ एक ओर अपने सकारात्मक प्रभावों के चलते लोगों को सचेत और जागरूँक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वहीं उसके नकारात्मक प्रभावों से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
  • यही कारण है कि एक जागरूक पाठक, दर्शक और श्रोता होने के कारण हमें अपनी आँखें, कान और दिमाग हमेशा खुले रखने चाहिए।
  • अर्थात किसी भी खबर या मुद्दे को बिना पूरी जानकारी के विश्वास नहीं करना चाहिए।


जनसंचार माध्यम कक्षा 11 ऐच्छिक अनिवार्य Reviewed by साहित्य संगम on August 30, 2025 Rating: 5

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