कैसे बनती है कविता कक्षा 12 ऐच्छिक
कैसे बनती है कविता कक्षा 12 ऐच्छिक
कविता क्या है?
· कविता मनुष्य के भावों
की अभिव्यक्ति का सुंदर प्रयास है।
· कविता को मानव की मातृभाषा भी कहा जाता है।
· कविता आकर्षक, पर
कभी-कभी जटिल भी होती है।
· कविता में अपने भावों और विचारों को
छंद, लय, ताल, स्वर में बाँधकर तथा प्रतीकों और
बिंबों के माध्यम से प्रकट किया जाता है।
· कवि के हृदय की तीव्र अनुभूति से ही
कविता की सृष्टि होती है।
· यह छंदबद्ध या मुक्त छंद में हो सकती
है।
· इसका जन्म लोरी, गीत, गुनगुनाहट, मांगलिक
गीतों आदि से होता है।
· तुकबंदी भी
कविता का एक रूप है।
कविता के महत्वपर्ण घटक –
· भाषा
–कविता लेखन और भावों की अभिव्यक्ति के लिए भाषा का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है।
· छंद
– कविता को अनुशासित और लयात्मक बनाने के लिए छंद का ज्ञान होना
आवश्यक है।
· संकेतों का प्रयोग – कविता में प्रत्येक
चिह्न का कुछ-न-कुछ अर्थ अवश्य होता है।
· समय का ज्ञान – समयानुसार
विषय, शैली में प्रचलित प्रवृत्तियों की पूरी जानकारी होना भी आवश्यक है।
· नवीन दृष्टि – कविता लिखने के लिए
कवि में सभी चीजों को देखने की नवीन दृष्टि होनी चाहिए।
· प्रतिभा – कवि
की व्यक्तिगत प्रतिभा और मौलिकता से ही श्रेष्ठ रचना रची जा सकती है।
· संक्षिप्तता – कवि में कम-से-कम
शब्दों में अधिक-से-अधिक बात कहने की क्षमता होनी चाहिए।
कविता में बिंब विधान –
· बिंब – किसी शब्द को पढ़कर या सुनकर जब हमारे
मन में कोई चित्र उभर आता है,
तो उसे काव्य की भाषा में बिंब कहा
जाता है।
· पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से पाँच बिंब
बनते हैं, जैसे- नेत्रों से दृश्य बिंब, कानों से श्रव्य बिंब, त्वचा से स्पृश्य बिंब, नासिका से घ्राण बिंब और जीभ से स्वाद्य बिंब।
· इन बिंबों के प्रयोग से ही कविता
आसानी से समझ में आने योग्य बनती है।
· उदाहरणस्वरूप पंतजी की कविता 'संध्या के बाद'
की ये पंक्तियाँ ली जा सकती हैं -
तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ
विधवाएँ जप-ध्यान में मगन,
मंथर धारा में बहता जिनका
अदृश्य गति अंतर-रोदन।
· कविता की इन पंक्तियों को पढ़ते ही बगुलों-सी
वृद्धाओं और विधवाओं का बगुलों जैसा सफेद रंग, उनका घुटे हुए सिर के कारण गर्दन का
आकार और सफेद वस्त्रों का एक चित्र उभर आता है।
· इस प्रकार बिंबों के माध्यम से कविता
को समझना आसान हो जाता है।
कविता में परिवेश/चित्रण –
· कविता का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व देशकाल
और वातावरण अर्थात् परिवेश होता है। उसी के अनुरूप कविता के सारे घटक परिचालित
होते हैं और भाषा, संरचना, बिंब, छंद आदि का चुनाव किया जाता है।
·
परिवेश (देशकाल व वातावरण) कविता की आत्मा है।
·
भाषा, बिंब, लय
आदि परिवेश के अनुसार चुने जाते हैं।
·
प्राकृतिक
परिवेश: प्रसाद जी की कविता ‘बीती
विभावरी’ में प्रकृति चित्रण।
·
ग्रामीण
परिवेश: नागार्जुन की कविता 'अकाल
और उसके बाद' में ग्रामीण शब्दावली का प्रयोग।

No comments: