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पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया कक्षा 12 ऐच्छिक अनिवार्य

 

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया कक्षा 12 ऐच्छिक अनिवार्य

  • समाचार लिखते हुए छह ककारों का ध्यान रखना ज़रूरी है। 
  • समाचारपत्रों में विचारपरक लेखन के तहत लेखटिप्पणियों और संपादकीय लेखन में भी विचारों और   विश्लेषण पर जोर होता है। 
  • समाचार कैसे लिखा जाता है
  • पत्रकारीय लेखन का सबसे जानापहचाना रूप समाचार लेखन है। 
  • आमतौर पर अखबारों में समाचार पूर्णकालिक और अंशकालिक पत्रकार लिखते हैंजिन्हें संवाददाता या    रिपोर्टर भी कहते हैं। 
  • अखबारों में प्रकाशित अधिकांश समाचार एक खास शैली में लिखे जाते हैं। 
  • उलटा पिरामिडशैली –
  • समाचार लेखन को उलटा पिरामिडशैली (इंवर्टेड पिरामिड स्टाइलके नाम से जाना जाता है। 
  • यह समाचार लेखन की सबसे लोकप्रियउपयोगी और बुनियादी शैली है।  

उल्टा पिरामिड शैली :- उल्टा पिरामिड शैली मे समाचार पत्र के सबसे महत्वपूर्ण तथ्य को सर्वप्रथम लिखा जाता है। उसके बाद घटते हुए महत्व क्रम में दूसरे तथ्यों या सूचनाओं को बताया जाता है। अर्थात कहानी की तरह क्लाइमैक्स अंत में नहीं वरन खबर के प्रारंभ में आ जाता है। इस शैली के अंतर्गत समाचारों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है 1.इंट्रो 2. बॉडी 3. समापन।

इंट्रो/लीड  हिन्दी में मुखड़ा  खबर के मूल तत्व को शुरू की दो /तीन पंक्तियों में संपूर्ण जानकारी निहित होती है।

बॉडी घटते क्रम में सभी खबर के तथ्य मौजूद होते हैं , अर्थात इसमें इंट्रो में दिए गए संपूर्ण जानकारी से कम जानकारी होती है।

समापन इस बिंदु में संपूर्ण जानकारी नहीं होती परंतु ऊपर दिए गए दोनों बिंदुओं में समाचार के सभी तथ्य मौजूद होते हैं। इसलिए इस बिंदु में सूचना को छोटा अथवा कम किया जा सकता है।

 

  • समाचार लेखन के लिए छह ककार- क्या, कब,कौन, कहाँ, क्यों,और कैसे
  • समाचार लेखन के लिए छह सूचनाओं का प्रयोग किया जाता है।
  • प्रथम चार ककार (क्या, कब, कौन, कहाँ) सूचनात्मक
  • अन्तिम दो ककार (क्यों, कैसे) विवरणात्मकव्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक 
  • प्रथम चार ककार समाचार का इण्ट्रो (मुखड़ा) व अन्तिम दो ककार बॉडी व समापन को निर्माण करते हैं।
  • समाचार को प्रभावी एवं पूर्ण बनाने के लिए ही इन छह ककारों का प्रयोग किया जाता है।

अच्छे लेखन के लिए ध्यान रखने योग्य बाते :-

  • जटिल व् कठिन वाक्य की तुलना में सरल व् छोटे वाक्य लिखने चाहिए।
  • आम बोलचाल में प्रयोग की जाने वाली भाषा और शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • गैरज़रूरी शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
  • शब्दों को प्रयोग उनके वास्तविक अर्थ को समझकर ही करना चाहिए।
  • यदि आप अच्छा लिखना चाहते हैं तो जानेमाने लेखकों की रचनाएँ ध्यान से पढ़नी चाहिए 
  • क्योंकि अच्छा लिखने के लिए अच्छा पढ़ना भी बहुत ज़रूरी है।
  • मुहावरों और लोकोक्तियों के प्रयोग से लेखन को आकर्षक बनाया जा सकता है।
  • एक अच्छे लेखक में तथ्यों को जुटाने और किसी विषय पर बारीकी से विचार करने का धैर्य होना चाहिए।

पत्रकारीय लेखन 

  • अखबार पाठकों के लिए बाहरी दुनिया के ज्ञान का ऐसा जरिया है जो हर रोज़ सुबह देशदुनिया और पासपड़ोस की घटनाओंसमस्याओंमुद्दों और विचारों से पाठकों को अवगत करवाते हैं। 
  • अखबार या अन्य समाचार माध्यमों में काम करने वाले पत्रकार अपने पाठकोंदर्शकों और श्रोताओं तक  सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखन के विभिन्न रूपों का इस्तेमाल करते हैं, इसे ही पत्रकारीय लेखन कहते हैं 

पत्रकार तीन तरह के होते हैंपूर्णकालिकअंशकालिक और फ्रीलांसर यानी स्वतंत्र। 

  • पूर्णकालिक पत्रकार किसी समाचार संगठन में काम करने वाला नियमित वेतन भोगी कर्मचारी   होता है 
  • अंशकालिक पत्रकार (स्ट्रिंगरकिसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय पर काम करने वाला  पत्रकार है। 
  • फ्रीलांसर पत्रकार का संबंध किसी खास अखबार से नहीं होता है बल्कि वह भुगतान के आधार पर अलगअलग अखबारों के लिए लेखन कार्य करता  है। 
  • पत्रकारिता की बैसाखियाँ
  • पहली बैसाखी –सच्चाई
  • दूसरी बैसाखी-संतुलन
  • तीसरी बैसाखी- निष्पक्षता
  • चोथी बैसाखीनिस-स्पष्टता
  • पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। 

पत्रकारिता के प्रकार

खोजपरक पत्रकारिता

  • खोजपरक पत्रकारिता से आशय ऐसी पत्रकारिता से है जिसमें गहराई से छान-बीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छुपाने का प्रयास किया जा रहा हो।
  • आमतौर पर खोजी पत्रकारिता सार्वजनिक महत्त्व के मामलों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को सामने लाने की कोशिश करती है।
  • खोजी पत्रकारिता का ही एक नया रूप टेलीविज़न में स्टिंग ऑपरेशन के रूप में सामने आया है।

विशेषीकृत पत्रकारिता :

  •  पत्रकारिता में विषय के हिसाब से विशेषता के सात प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • इनमें संसदीय पत्रकारिता, न्यायालय पत्रकारिता, आर्थिक पत्रकारिता, खेल पत्रकारिता, विज्ञान और विकास पत्रकारिता, अपराध पत्रकारिता तथा फ़ैशन और फ़िल्म पत्रकारिता शामिल हैं।

वॉचडॉग पत्रकारिता :

  • लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगाह रखना है
  • और कहीं भी कोई गड़बड़ी हो तो उसका परदाफ़ाश करना है।
  • इसे परंपरागत रूप से वॉचडॉग पत्रकारिता कहा जाता है। 

एडवोकेसी पत्रकारिता :

  • किसी खास उद्देश्य या मुद्दे को लेकर आगे बढ़ते हैं और उस विचारधारा या उद्देश्य या मुद्दे के पक्ष में जनमत बनाने के लिए लगातार और ज़ोर-शोर से अभियान चलाते हैं।
  •  इस तरह की पत्रकारिता को पक्षधर या एडवोकेसी पत्रकारिता कहा जाता है। 

वैकल्पिक पत्रकारिता :

  • स्थापित व्यवस्था के विकल्प को सामने लाने और उसके अनुकूल सोच को अभिव्यक्त करता है उसे वैकल्पिक पत्रकारिता कहा जाता है। 

पत्रकारिता का महत्व

  • देश –विदेश की गतिविधियों की जानकारी
  • जनसामान्य को उसके कर्तव्य और अधिकारों की जानकारी
  • रोजगार के अवसर तलासने में सहायक
  • राष्ट्रीय चेतना का सशक्त आधार
  • युगीन समस्याओं से जनता को जोड़ना
  • मानव कल्याण की प्रेरणा

कार्टून कोना

  • कार्टून कोना हर समाचारपत्र में होता है और उनके माध्यम से की गई सटीक टिप्पणियाँ पाठक को छूती हैं।
  • इनकी चुटीली टिप्पणियाँ कई बार कड़े और धारदार संपादकीय से भी अधिक प्रभावी होती हैं।
  • पेज थी पत्रकारिता-
  • पेज थ्री पत्रकारिता का तात्पर्य ऐसी पत्रकारिता से है जिसमें फ़ैशन, अमीरों की पार्टियों, महफ़िलों और जाने-माने लोगों (सेलीब्रिटी) के निजी जीवन के बारे में बताया जाता है।
  • यह आमतौर पर समाचार पत्रों के पृष्ठ तीन पर प्रकाशित होती रही है।
  • इसलिए इसे पेज थ्री पत्रकारिता कहते हैं।

न्यूज़पेग-

  • न्यूज़पेग का अर्थ है किसी मुद्दे पर लिखे जा रहे लेख या फ़ीचर में उस ताज़ा घटना का उल्लेख, जिसके कारण वह मुद्दा चर्चा में आ गया है।
  • डेडलाइन-समय सीमा
  • समाचार माध्यमों में किसी समाचार को प्रकाशित या प्रसारित होने के लिए पहुँचने की आखिरी समय-सीमा को डेडलाइन कहते हैं।

पीत पत्रकारिता (येलो जर्नलिज़्म)-

  • यह पत्रकारिता सनसनी फैलाने का कार्य करती है।
  • उस समय के प्रमुख समाचार पत्रों ने पाठकों को लुभाने के लिए झूठी अफ़वाहों, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोपों, प्रेम संबंधों, भंडाफोड़ और फ़िल्मी गपशप को समाचार की तरह प्रकाशित किया। उसमें तत्व अहम था।

संपादकीय लेखन

  • संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले संपादकीय को अख़बार की आवाज /अख़बार की आत्मा माना जाता है। 
  • संपादकीय के ज़रिये अखबार किसी घटनासमस्या या मुद्दे के प्रति अपनी राय प्रकट करते हैं। 
  • संपादकीय पृष्ठ को समाचार-पत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण पृष्ठ माना जाता है।  
  • संपादकीयका सामान्य अर्थ है- संपादक के अपने विचार।

संपादन

  • संपादन का अर्थ है किसी सामग्री से उसकी अशुद्धियों को दूर करके उसे पठनीय बनाना।
  • एक उपसंपादक अपने रिपोर्टर की खबर को ध्यान से पढ़ता है और उसकी भाषा-शैली, व्याकरण, वर्तनी तथा तथ्य संबंधी अशुद्धियों को दूर करता है।
  • वह खबर के महत्त्व के अनुसार उसे काटता-छाँटता है और उसे कितनी और कहाँ जगह दी जाए, यह तय करता है।

संपादन के सिद्धांत 

तथ्यों की शुद्धता (एक्युरेसी)- एक आदर्श रूप में मीडिया और पत्रकारिता यथार्थ या वास्तविकता का प्रतिबिंब है,अत: तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत नही किया जाना चाहिए ।

वस्तुपरकता (ऑब्जेक्टीविटी)- वस्तुपरकता का तकाज़ा यही है कि एक पत्रकार समाचार के लिए तथ्यों का संकलन और उसे प्रस्तुत करते हुए अपने आकलन को अपनी धारणाओं या विचारों से प्रभावित न होने दे।

निष्पक्षता (फ़ेयरनेस)- एक पत्रकार के लिए निष्पक्ष होना भी बहुत ज़रूरी है। उसकी निष्पक्षता से ही उसके समाचार संगठन की साख बनती है। 

संतुलन (बैलेंस)- समाचार को किसी एक पक्ष में झुका नही होना चाहिए दोनों पक्षों की बात बराबर होनी चाहिए

स्रोत (सोर्सिंग-एट्रीब्यूशन)- जानकारी का स्रोत होना आवश्यक है

स्तंभ (कॉलमलेखन

  • स्तंभ लेखन भी विचारपरक लेखन का एक प्रमुख रूप है। 
  • स्तंभ (कॉलममें लेखक के विचार अभिव्यक्त होते हैं। यही कारण है कि स्तंभ (कॉलमअपने लेखकों के नाम पर जाने और पसंद किए जाते हैं। 
लेख
  • सभी अखबार संपादकीय पृष्ठ पर समसामयिक मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकारों और उन विषयों के विशेषज्ञों के लेख प्रकाशित करते हैं।
  • लेखों में किसी विषय या मुद्दे पर  विस्तार से चर्चा की जाती है।
  • लेख में लेखक के विचारों को प्रमुखता दी जाती है।
  • लेख लिखने के लिए पर्याप्त तैयारी ज़रूरी है। इसके लिए उस विषय से जुड़े सभी तथ्यों और सूचनाओं के     अलावा पृष्ठभूमि सामग्री भी जुटानी पड़ती है।

 

साक्षात्कार/इंटरव्यू

  • समाचार माध्यमों में साक्षात्कार का बहुत महत्त्व है। 
  • पत्रकारिय साक्षात्कार और सामान्य बातचीत में यह फर्क होता है कि साक्षात्कार में एक पत्रकार किसी अन्य व्यक्ति से तथ्यउसकी राय और भावनाएँ जानने के लिए सवाल पूछता है।

 

साक्षात्कार से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें –

  • साक्षात्कार का एक स्पष्ट मकसद और ढाँचा होता है।
  • एक सफल साक्षात्कार के लिए आपके पास  सिर्फ ज्ञान होना चाहिए बल्कि आपमें संवेदनशीलताकूटनीतिधैर्य और साहस जैसे गुण भी होने चाहिए।
  • एक अच्छे और सफल साक्षात्कार के लिए यह ज़रूरी है कि आप जिस विषय पर और जिस व्यक्ति के साथ   साक्षात्कार करने जा रहे हैंउसके बारे में आपके पास पर्याप्त जानकारी हो।
  • आपको वे सवाल पूछने चाहिए जो किसी अखबार के एक आम पाठक के मन में हो सकते हैं।

 


पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया कक्षा 12 ऐच्छिक अनिवार्य Reviewed by साहित्य संगम on August 30, 2025 Rating: 5

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