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व्याकरणिक कोटियाँ

 

व्याकरणिक कोटियाँ

(RPSC Senior Teacher Hindi – सिलेबस अनुसार)

व्याकरण में शब्दों के रूप और उनके संबंध को बताने वाली श्रेणियों को व्याकरणिक कोटियाँ कहते हैं। मुख्य कोटियाँ हैं लिंग, वचन, कारक, काल


🔵 1. लिंग

परिभाषा

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से स्त्री या पुरुष जाति का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं।

भेद

  1. पुल्लिंगलड़का, घोड़ा, पेड़
  2. स्त्रीलिंगलड़की, घोड़ी, नदी

पहचान के नियम (संकेत मात्र)

  • पर समाप्त शब्द अक्सर पुल्लिंग लड़का
  • ई/इयापर समाप्त शब्द अक्सर स्त्रीलिंग लड़की, बुढ़िया
    (
    अपवाद ध्यान रखें पानी, दादी आदि)

🔴 2. वचन

परिभाषा

शब्द के जिस रूप से संख्या (एक या अधिक) का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।

भेद

  1. एकवचनलड़का, पुस्तक
  2. बहुवचनलड़के, पुस्तकें

उदाहरण

एकवचन

बहुवचन

बालक

बालक

लड़की

लड़कियाँ

नदी

नदियाँ

पुस्तक

पुस्तकें


🟢 3. कारक

परिभाषा

संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य में क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं।

हिंदी में 8 कारक

कारक

चिह्न

उदाहरण

कर्ता

ने

राम ने खाना खाया।

कर्म

को

राम ने सीता को बुलाया।

करण

से

वह कलम से लिखता है।

संप्रदान

को/के लिए

मैंने उसे पुस्तक दी।

अपादान

से

वह पेड़ से गिरा।

संबंध

का/की/के

राम का घर

अधिकरण

में/पर

वह घर में है।

संबोधन

हे, अरे

हे राम!


🟣 4. काल

परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से समय का बोध हो, उसे काल कहते हैं।

भेद

  1. वर्तमान कालअभी का समय
    • वह पढ़ता है।
  2. भूतकालबीता हुआ समय
    • वह पढ़ा।
  3. भविष्यत् कालआने वाला समय
    • वह पढ़ेगा।

तीनों काल का उदाहरण

काल

वाक्य

वर्तमान

मैं खेलता हूँ।

भूत

मैं खेला।

भविष्य

मैं खेलूँगा।


🧠 परीक्षा टिप (Quick Trick)

  • लिंग स्त्री/पुरुष
  • वचन एक/अनेक
  • कारक क्रिया से संबंध
  • काल समय

 

व्याकरणिक कोटियाँ Reviewed by साहित्य संगम on March 02, 2026 Rating: 5

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