सूरदास की झोंपड़ी – प्रेमचंद का प्रेरक अंश | Rangbhumi Summary in Hindi
सूरदास की झोंपड़ी – प्रेमचंद का प्रेरक अंश | Rangbhumi Summary in Hindi
परिचय
हिंदी साहित्य के महान यथार्थवादी लेखक प्रेमचंद (1880–1936) ने अपने उपन्यास “रंगभूमि” में समाज के विभिन्न वर्गों की सच्चाई और मानवीय मूल्यों का सजीव चित्रण किया है। इस उपन्यास का एक अंश “सूरदास की झोंपड़ी” विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसमें एक अंधे, पर स्वाभिमानी व्यक्ति सूरदास की दृढ़ता और जीवन-संघर्ष का मार्मिक प्रसंग मिलता है।
सूरदास की झोंपड़ी का सारांश
- भैरों और जगधर सूरदास से ईर्ष्या करते थे।
- भैरों की पत्नी सुभागी मार से बचकर सूरदास की झोंपड़ी में छिप गई → पूरे मोहल्ले में सूरदास की बदनामी हुई।
- बदला लेने के लिए भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी में आग लगा दी और उसकी पाँच सौ रुपयों की पोटली चुरा ली।
- झोंपड़ी और रुपयों के जल जाने पर सूरदास गहरा आहत हुआ, क्योंकि उन्हीं पैसों से वह श्राद्ध, विवाह और धर्म-कर्म करना चाहता था।
- फिर भी उसने किसी से प्रतिशोध नहीं लिया।
- जब बच्चों ने पूछा – “अगर कोई सौ लाख बार झोंपड़ी जला दे तो?”
- तो सूरदास ने दृढ़ उत्तर दिया –
सूरदास के चरित्र की विशेषताएँ
- अंधे होने पर भी स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर।
- विपत्ति में भी धैर्य और साहस न छोड़ना।
- दूसरों के प्रति कोई द्वेष नहीं।
- पुनर्निर्माण में विश्वास – हर बार नई शुरुआत करने की प्रेरणा।
मुख्य संदेश
- ईर्ष्या और द्वेष से समाज का नुकसान होता है।
- सच्चा जीवन वही है जिसमें धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण की शक्ति हो।
- कठिनाइयों से घबराना नहीं, बल्कि हर बार नया जीवन आरंभ करना ही असली वीरता है।
निष्कर्ष
“सूरदास की झोंपड़ी” सिर्फ एक साहित्यिक अंश नहीं बल्कि जीवन का बड़ा सबक है। यह हमें सिखाता है कि विपत्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसान को आशा और हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।
सूरदास की झोंपड़ी – प्रेमचंद का प्रेरक अंश | Rangbhumi Summary in Hindi
Reviewed by साहित्य संगम
on
September 10, 2025
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