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क्षितिज भाग 2 संस्कृति

 

संस्कृति : पाठ का सारांश


'संस्कृति' पाठ में लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन ने सभ्यता और संस्कृति के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझाया है। वे कहते हैं कि ये दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनके अर्थ में महत्वपूर्ण अंतर है।

संस्कृति क्या है?

प्रेरणा या योग्यता: यह वह प्रेरणा, योग्यता या प्रवृत्ति है जिसके कारण मनुष्य किसी नई चीज़ की खोज करता है।

उदाहरण:

जिस व्यक्ति ने पहली बार आग का आविष्कार किया, उसकी वह प्रेरणा ही उसकी संस्कृति है।

जिस व्यक्ति ने सुई-धागे का आविष्कार किया, उसकी वह रचनात्मक बुद्धि उसकी संस्कृति है।

न्यूटन की वह योग्यता जिसके कारण उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को समझा, वह उनकी संस्कृति है।

सभ्यता क्या है?

परिणाम या फल: यह संस्कृति का परिणाम है। किसी संस्कृत व्यक्ति द्वारा किया गया आविष्कार या खोज ही सभ्यता कहलाती है।

उदाहरण:

आग का आविष्कार एक सभ्यता है।

सुई-धागे का आविष्कार एक सभ्यता है।

आज के वैज्ञानिक भले ही न्यूटन से अधिक ज्ञानी हों, पर वे न्यूटन से अधिक सभ्य तो हो सकते हैं, लेकिन न्यूटन की तरह 'संस्कृत' नहीं कहे जा सकते, क्योंकि न्यूटन ने उस सिद्धांत को स्वयं खोजा था।

मानव संस्कृति का सार:

लेखक के अनुसार, संस्कृति केवल पेट भरने या शरीर ढकने की इच्छा से ही नहीं जन्म लेती।

जो व्यक्ति भरा पेट होते हुए भी खुले आसमान के नीचे तारों को देखकर बेचैन हो उठता है और उनकी गुत्थी सुलझाना चाहता है, वही सच्चा संस्कृत व्यक्ति है।

दूसरे के सुख के लिए अपने सुख का त्याग करना (जैसे, लेनिन का अपनी रोटी दूसरे को दे देना या सिद्धार्थ का घर छोड़ना) भी संस्कृति का ही हिस्सा है।

मानव संस्कृति एक अविभाज्य इकाई है, जिसे धर्म, जाति या देश के आधार पर बाँटा नहीं जा सकता। इसमें जो भी कल्याणकारी तत्व हैं, वे स्थायी होते हैं और कभी नष्ट नहीं होते।

यह पाठ हमें समझाता है कि संस्कृति आविष्कार करने की शक्ति है, जबकि सभ्यता उस आविष्कार का उपयोग है। सच्ची संस्कृति वही है जो मानव कल्याण की भावना पर आधारित हो।

क्षितिज भाग 2 संस्कृति Reviewed by साहित्य संगम on September 02, 2025 Rating: 5

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