कृतिका भाग 2 साना-साना हाथ जोड़ी
साना-साना हाथ जोड़ी : पाठ का सारांश
'साना-साना हाथ जोड़ी'
लेखिका मधु कांकरिया द्वारा
लिखित एक यात्रा वृत्तांत है। इसमें उन्होंने सिक्किम की राजधानी गैंगटॉक (गंतोक)
से यूमथांग तक की अपनी यात्रा का वर्णन
किया है, जो हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और वहाँ के लोगों
के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाती है।
गैंगटॉक का सौंदर्य: लेखिका गैंगटॉक को 'मेहनतकश बादशाहों
का शहर' कहती हैं। रात में शहर की जगमगाहट उन्हें
मंत्रमुग्ध कर देती है। सुबह वे एक नेपाली युवती से 'साना-साना हाथ
जोड़ी...' प्रार्थना सीखती हैं, जिसका अर्थ है 'छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती
हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।'
बौद्ध धर्म और आस्था: यात्रा के दौरान लेखिका को बौद्ध धर्म की सफेद और रंगीन पताकाएँ
दिखती हैं। सफेद पताकाएँ शांति और अहिंसा का प्रतीक होती हैं और इनका उपयोग किसी
की मृत्यु पर किया जाता है, जबकि रंगीन पताकाएँ किसी शुभ कार्य की शुरुआत पर
लगाई जाती हैं। वे एक 'प्रेयर व्हील' (धर्म
चक्र) भी देखती हैं, जिसके बारे में गाइड जितेन नार्गे बताते हैं कि इसे
घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। लेखिका को लगता है कि आस्था और विश्वास हर जगह
एक जैसे होते हैं।
पहाड़ी जीवन की कठिनाइयाँ: लेखिका रास्ते में पत्थरों को तोड़कर सड़क बनाती हुई महिलाओं और
पीठ पर बच्चों को लादे हुए काम करती औरतों को देखती हैं। वे देखकर हैरान हो जाती
हैं कि ये लोग कितनी मुश्किलों से जीवन व्यतीत करते हैं। वे देखती हैं कि
छोटे-छोटे बच्चे भी स्कूल से लौटकर मवेशी चराने जाते हैं और शाम को सिर पर
लकड़ियों के गट्ठर ढोकर लाते हैं।
हिमालय और सेना का सम्मान: लेखिका कटाओ पहुँचकर बर्फ से
ढके पहाड़ों को देखकर बेहद खुश होती हैं। वहाँ वे भारतीय सेना के जवानों को भी
देखती हैं और उनसे बात करके महसूस करती हैं कि इन सैनिकों की वजह से ही देशवासी
सुरक्षित हैं। उनका मन सैनिकों के प्रति सम्मान से भर जाता है।
निष्कर्ष: यह यात्रा वृत्तांत केवल प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन नहीं है,
बल्कि यह हिमालय के कठिन जीवन, वहाँ के लोगों
की मेहनत, उनके विश्वासों और भारतीय सैनिकों के त्याग को भी
दर्शाता है। लेखिका महसूस करती हैं कि प्रकृति, संस्कृति और
जीवन संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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