आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ
आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ
आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ (1000
ई. से अब तक)
आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं का विकास अपभ्रंश से हुआ है। इसका समयकाल 1000 ई. से वर्तमान तक माना जाता है। यह कालखंड भारत के स्वतंत्रता से पहले के स्वरूप को शामिल करता है, जिसमें आज के पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार के क्षेत्र भी शामिल माने जाते हैं।
🔹 डॉ. ए. एफ. आर. हार्नले का वर्गीकरण (1880)
- हार्नले
ने आधुनिक आर्य भाषाओं को चार प्रमुख वर्गों में बाँटा:
- पूर्वी
गौडियन –
पूर्वी हिन्दी, बंगाली, असमी,
उड़िया
- पश्चिमी
गौडियन –
पश्चिमी हिन्दी, राजस्थानी, गुजराती, सिन्धी, पंजाबी
- उत्तरी
गौडियन –
गढ़वाली, नेपाली, पहाड़ी
- दक्षिणी
गौडियन –
मराठी
- उन्होंने यह भी कहा कि:
- भीतरी
आर्य =
मध्य भारत के निवासी
- बाहरी
आर्य =
चारों दिशाओं में फैले हुए समुदाय
🔸 डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन का वर्गीकरण (1920)
- ग्रियर्सन
ने लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया में भाषाओं को तीन उपशाखाओं में बाँटा:
🔹 1. बाहरी उपशाखा
- उत्तर-पश्चिमी
भाषाएं:
लहँदा, सिन्धी
- दक्षिणी
भाषाएं:
मराठी
- पूर्वी
भाषाएं:
उड़िया, बिहारी, बंगाली,
असमिया
🔹 2. मध्य उपशाखा
- पूर्वी हिन्दी
🔹 3. भीतरी उपशाखा
- केन्द्रीय
भाषाएं:
पश्चिमी हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, राजस्थानी आदि
- पहाड़ी
भाषाएं:
पूर्वी पहाड़ी (नेपाली), मध्य पहाड़ी, पश्चिमी पहाड़ी
🔸 डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी का वैज्ञानिक वर्गीकरण
- उन्होंने
ग्रियर्सन की ध्वनि और व्याकरण पर आधारित आलोचना करते हुए वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया:
- उदीच्य –
सिन्धी, लहँदा, पंजाबी
- प्रतीच्य –
राजस्थानी, गुजराती
- मध्य
देशीय –
पश्चिमी हिन्दी
- प्राच्य –
पूर्वी हिन्दी, बिहारी, उड़िया,
असमिया, बंगाली
- दक्षिणात्य –
मराठी
आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ
Reviewed by साहित्य संगम
on
August 30, 2025
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