आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं की विशेषताएँ
आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं की विशेषताएँ
🗣️ प्रमुख आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं की विशेषताएँ
🔹 सिन्धी भाषा
- ‘सिन्धी’ शब्द संस्कृत के “सिन्धु” से बना है।
- यह सिन्धु नदी के दोनों किनारों पर बोली जाती है।
- प्रमुख
बोलियाँ: विचोली, सिराइकी, थरेली, लासी, लाड़ी।
- लिपियाँ:
लंडा (मुख्य), गुरुमुखी और फारसी लिपि में भी लिखी
जाती है।
🔹 लहँदा भाषा
- ‘लहँदा’ का अर्थ होता है ‘पश्चिमी’।
- इसके
अन्य नाम: पश्चिमी पंजाबी, हिन्दकी, जटकी, मुल्तानी, चिभाली,
पोठवारी।
- लिपि:
लंडा,
जो शारदा लिपि की उपशाखा है।
🔹 पंजाबी भाषा
- ‘पंजाबी’ शब्द ‘पंजाब’ (पाँच नदियों का देश) से बना है।
- प्रमुख
बोलियाँ: माझी, डोगरी, दोआबी,
राठी।
- लिपि:
प्रारंभिक लिपि ‘लंडा’ थी। गुरु अंगद ने इसे सुधारकर ‘गुरुमुखी’ लिपि बनाई।
🔹 गुजराती भाषा
- ‘गुजरात’ शब्द ‘गुर्जर’ जाति से बना है।
- लिपि:
गुजराती (कैथी लिपि से मिलती-जुलती), इसमें
शिरोरेखा नहीं होती।
🔹 मराठी भाषा
- मराठी,
महाराष्ट्र की प्रमुख भाषा है।
- बोलियाँ:
कोंकणी,
नागपुरी, कोष्टी, माहारी।
- लिपि: देवनागरी (कुछ स्थानों पर मोडी लिपि का भी प्रयोग होता है)।
🔹 बंगला भाषा
- ‘बंगला’ शब्द ‘बंग’ से बना है।
- यह बंगाल की भाषा है और उस पर यूरोपीय विचारधारा का प्रभाव सर्वप्रथम पड़ा।
- लिपि: प्राचीन देवनागरी से विकसित बंगला लिपि।
🔹 असमी (असमिया) भाषा
- असम की प्रमुख भाषा है।
- प्रमुख बोली: विश्नुपुरिया।
- लिपि: बंगला लिपि का उपयोग।
🔹 उड़िया भाषा
- यह ओड़िशा (पूर्व में उत्कल) की भाषा है।
- प्रमुख
बोलियाँ: गंजामी, सम्भलपुरी, भत्री।
- लिपि: ब्राह्मी की उत्तरी शैली से विकसित।
आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं की विशेषताएँ
Reviewed by साहित्य संगम
on
August 30, 2025
Rating:

No comments: