प्राचीन भारतीय आर्य भाषा
प्राचीन भारतीय आर्य भाषा
🕉️ भारतीय आर्य भाषाओं का विकास
भारत
की आर्य भाषाएं अपने इतिहास और विकासक्रम में तीन प्रमुख कालों में विभाजित की जाती
हैं: प्राचीन, मध्यकालीन, और आधुनिक। यहां हम प्राचीन और मध्यकालीन चरणों का संक्षिप्त और स्पष्ट विवरण
प्रस्तुत कर रहे हैं:
🔹 1. प्राचीन भारतीय आर्य भाषा
👉 वैदिक संस्कृत (2000 ई.पू.
– 800 ई.पू.)
यह
भारत की सबसे प्राचीन ज्ञात भाषा है, जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद,
सामवेद और अथर्ववेद सहित वैदिक साहित्य की
रचना हुई। इसे वैदिकी या छांदस भाषा भी कहते हैं।
वैदिक
साहित्य को तीन वर्गों में बांटा गया है: संहिता, ब्राह्मण, और उपनिषद।
डॉ.
धीरेन्द्र वर्मा आदि के अनुसार वैदिक संस्कृत में 13 स्वर
और 39 व्यंजन (कुल 52 ध्वनियाँ) होती थीं।
👉 लौकिक संस्कृत (800 ई.पू.
– 500 ई.पू.)
पाणिनि
की अष्टाध्यायी के अनुसार व्यवस्थित रूप में विकसित संस्कृत को लौकिक संस्कृत कहते हैं। यह व्याकरण-सम्मत, साहित्यिक एवं शिक्षित वर्ग की भाषा रही है।
लौकिक
संस्कृत में 48
ध्वनियाँ थीं, क्योंकि वैदिक संस्कृत की कुछ ध्वनियाँ
जैसे ळ, ळह, जिह्वमूलीय और उपध्मानीय लुप्त हो गईं।

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