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भाषा के अंग: Bhasha Ke Ang

 

भाषा के अंग: Bhasha Ke Ang

भाषा को समझने के लिए उसके पाँच मूलभूत अंगों को जानना आवश्यक है। ये अंग मिलकर भाषा की संरचना को पूर्ण करते हैं:

1️ ध्वनि (Sound)

जब हम बोलते हैं, तो हमारे मुख से जो स्वतंत्र आवाज़ निकलती है, उसे ध्वनि कहा जाता है।
🔸 यह मौखिक भाषा का सबसे मूलभूत तत्व है।
🔸 उदाहरण: क, , ग जैसी आवाजें।

2️ वर्ण (Letter/Syllable)

वर्ण वह मूल ध्वनि होती है जिसे और अधिक टुकड़ों में विभाजित नहीं किया जा सकता।
🔸 ये ध्वनियाँ भाषा की बुनियाद होती हैं।
🔸 उदाहरण: अ, क्, भ्, म्, त्।

3️ शब्द (Word)

जब वर्ण एक विशेष क्रम में मिलते हैं और कोई अर्थ व्यक्त करते हैं, तो वह एक शब्द बनता है।
🔸 उदाहरण:
क् + अ + म् + अ + ल् = कमल
भ् + आ + ष् + आ = भाषा

4️ वाक्य (Sentence)

जब सार्थक शब्दों का समूह किसी सोच या विचार को पूर्ण रूप से प्रकट करता है, तो वह वाक्य कहलाता है।
🔸 उदाहरण: कमल हिन्दी भाषा पढ़ रहा है।
यदि इसे उल्टा कर दें: हिन्दी है रहा कमल पढ़ भाषा, तो इसका कोई अर्थ नहीं निकलेगा।

5️ लिपि (Script)

मौखिक भाषा को लिखने के लिए जिन प्रतीकों या चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें लिपि कहा जाता है।
🔸 उदाहरण:
हिन्दी की देवनागरी लिपि,
उर्दू की फारसी लिपि,
अंग्रेज़ी की रोमन लिपि।

भाषा के अंग: Bhasha Ke Ang Reviewed by साहित्य संगम on August 28, 2025 Rating: 5

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