गूँगे कहानी का सारांश | Class 11 Hindi Antra Chapter 4 Summary
गूँगे कहानी का सारांश | Class 11 Hindi Antra Chapter 4 Summary
✍️ लेखक परिचय – रांगेय राघव
- हिन्दी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न लेखक रांगेय राघव का जन्म आगरा में हुआ।
- उनका वास्तविक नाम तिरुमल्ले गंबाकम वीर राघव आचार्य था।
- शिक्षा: एम.ए. और पी-एच.डी. (हिन्दी, आगरा विश्वविद्यालय)
- प्रमुख रचनाएँ: घरौंदा, विषाद-मठ, कब तक पुकारूँ, अँधेरे के जुगनू, रामराज्य का वैभव, देवदासी आदि।
- योगदान: समाज के शोषित और पीड़ित वर्ग के जीवन का सजीव और मर्मस्पर्शी चित्रण।
📖 गूँगे कहानी का संक्षिप्त कथानक
‘गूँगे’ कहानी एक गूंगे-बहरे किशोर के जीवन संघर्ष पर आधारित है। लेखक ने इसमें समाज के दिव्यांगों के प्रति असंवेदनशीलता और उपेक्षा को बड़े मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
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गूंगा किशोर – न सुन सकता, न बोल सकता; परन्तु बुद्धिमान और स्वाभिमानी है।
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बाल्यकाल की पीड़ा – माँ छोड़कर चली गई, पिता का देहांत हो गया। रिश्तेदार उसे पल्लेदारी में धकेलना चाहते थे।
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संघर्षपूर्ण जीवन – मजदूरी करता है, भीख नहीं मांगता। गले की चोट के कारण अस्फुट ध्वनियाँ निकालता है।
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चमेली का आश्रय – करुणा से प्रेरित होकर चमेली उसे अपने घर नौकर रख लेती है।
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अन्याय और अपमान –
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बेटे बसन्ता से पिटता है।
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चोरी के आरोप झेलता है।
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घर से निकाल दिया जाता है।
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अंतिम प्रसंग – गूंगा सड़क के लड़कों से पिटकर खून से लथपथ लौटता है। चमेली उसे देखकर रो पड़ती है। लेखक के अनुसार, पूरा समाज ही “गूंगा” बन चुका है जो अन्याय और शोषण के सामने मौन है।
🎯 कहानी की विशेषताएँ
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समाज की संवेदनहीनता का चित्रण।
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गूंगे का स्वाभिमान और संघर्ष।
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कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ – अन्याय सहते समाज की चुप्पी।
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भाषा सरल, करुणा और यथार्थ से परिपूर्ण।
📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
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लेखक: रांगेय राघव
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पात्र: गूंगा, चमेली, बसन्ता, सुशीला
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मुख्य संदेश: समाज अन्याय के सामने गूंगा बना हुआ है।
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विधा: सामाजिक यथार्थवादी कहानी
📝 निष्कर्ष
‘गूँगे’ केवल एक दिव्यांग किशोर की कथा नहीं, बल्कि पूरे समाज का प्रतीक है। आज भी समाज में अन्याय और शोषण देखने को मिलता है, परंतु अधिकांश लोग मौन रहते हैं। यही मौन ही सबसे बड़ा अपराध है।

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