छंद (Chhand) क्या है? परिभाषा, प्रकार और उदाहरण | Class 11 Hindi Short Notes
छंद (Chhand) क्या है? परिभाषा, प्रकार और उदाहरण | Class 11 Hindi Short Notes
छंद क्या है?
अक्षर संख्या, मात्रागणना, यति-गति और तुक आदि विशेष नियमों से बंधी पद्य रचना को छंद (Chhand) कहते हैं। गद्य का नियम व्याकरण है और पद्य का नियम छंदशास्त्र।
परिभाषा
-
अक्षर संख्या, मात्रागणना, यति-गति आदि विशेष नियमों से बंधी पद्यरचना छंद कहलाती है।
-
गद्य का नियम = व्याकरण, पद्य का नियम = छंदशास्त्र।
-
छंद हृदय की सौंदर्य-भावना को जगाता है।
-
तुक = छंद का प्राण।
अक्षर संख्या, मात्रागणना, यति-गति आदि विशेष नियमों से बंधी पद्यरचना छंद कहलाती है।
गद्य का नियम = व्याकरण, पद्य का नियम = छंदशास्त्र।
छंद हृदय की सौंदर्य-भावना को जगाता है।
तुक = छंद का प्राण।
वर्ण और मात्रा
-
वर्ण दो प्रकार – लघु (ह्रस्व = 1 मात्रा), गुरु (दीर्घ = 2 मात्राएँ)।
-
मात्रा केवल स्वर की होती है, व्यंजन की नहीं।
-
लघु कभी-कभी गुरु हो जाता है (अनुस्वार, विसर्ग, संयुक्त व्यंजन आदि से)।
-
गुरु कभी-कभी लघु हो सकता है (ए, ओ का ह्रस्व उच्चारण होने पर)।
वर्ण दो प्रकार – लघु (ह्रस्व = 1 मात्रा), गुरु (दीर्घ = 2 मात्राएँ)।
मात्रा केवल स्वर की होती है, व्यंजन की नहीं।
लघु कभी-कभी गुरु हो जाता है (अनुस्वार, विसर्ग, संयुक्त व्यंजन आदि से)।
गुरु कभी-कभी लघु हो सकता है (ए, ओ का ह्रस्व उच्चारण होने पर)।
वर्ण और मात्रा
-
लघु वर्ण (ह्रस्व) – 1 मात्रा
-
गुरु वर्ण (दीर्घ) – 2 मात्राएँ
-
मात्रा केवल स्वर की होती है, व्यंजन की नहीं।
गण (8 प्रकार)
-
तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं।
-
8 प्रकार – मगण (ऽऽऽ), नगण (।।।), भगण (ऽ।।), जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), यगण (।ऽऽ), रगण (ऽ।ऽ), तगण (ऽऽ।)।
-
याद रखने का सूत्र – य-मा-ता-रा-ज-भा-न-स-गा।
तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं।
8 प्रकार – मगण (ऽऽऽ), नगण (।।।), भगण (ऽ।।), जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), यगण (।ऽऽ), रगण (ऽ।ऽ), तगण (ऽऽ।)।
याद रखने का सूत्र – य-मा-ता-रा-ज-भा-न-स-गा।
मगण, नगण, भगण, जगण, सगण, यगण, रगण, तगण।
👉 याद रखने का सूत्र – “य-मा-ता-रा-ज-भा-न-स-गा”
| छंद | प्रकार | मात्राएँ/वर्ण | यति | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| दोहा | अर्धसम | 13/11 | चरण अंत | कबीर, तुलसीदास की रचनाएँ |
| सोरठा | अर्धसम | 11/13 | चरण अंत | दोहे का उल्टा |
| चौपाई | सम मात्रिक | 16-16 | चरण अंत | रामचरितमानस में |
| रोला | सम मात्रिक | 24 | 11 और 13 | लम्बे पद्य में |
| मन्दाक्रान्ता | वर्णिक सम | 17 वर्ण | 4, 6, 7 | कविताओं में |
| शिखरिणी | वर्णिक सम | 17 वर्ण | 6 और 11 | संस्कृत छंद |
| वसन्ततिलका | वर्णिक सम | 14 वर्ण | अंत में | सरल लयबद्ध |
| मालिनी | वर्णिक सम | 15 वर्ण | 8 और 7 | संस्कृत ग्रंथों में |
यति और गति
-
यति = पढ़ते समय ठहराव।
-
गति = छंद की लय।
-
मात्राएँ सही होने पर भी यदि गति न हो तो छंद अधूरा है।
यति = पढ़ते समय ठहराव।
गति = छंद की लय।
मात्राएँ सही होने पर भी यदि गति न हो तो छंद अधूरा है।
छंदों के प्रकार
-
मात्रिक छंद – मात्राओं की गिनती पर आधारित।
-
वर्णिक छंद – वर्णों की गिनती पर आधारित।
-
लयात्मक छंद – गीत आदि।
मात्रिक छंद – मात्राओं की गिनती पर आधारित।
वर्णिक छंद – वर्णों की गिनती पर आधारित।
लयात्मक छंद – गीत आदि।
छंद तीन प्रकार के होते हैं –
-
सम – सभी चरणों में समान मात्राएँ। (जैसे – चौपाई)
-
अर्धसम – दो-दो चरणों में समान मात्राएँ। (जैसे – दोहा, सोरठा)
-
विषम – न सम, न अर्धसम। (जैसे – कुण्डलिया)
मुख्य छंद (कक्षा 11)
-
दोहा –
-
अर्धसम मात्रिक छंद।
-
विषम चरण = 13 मात्राएँ, सम चरण = 11 मात्राएँ।
-
यति चरण के अंत में।
-
तुक सामान्यतः सम चरणों में।
-
सोरठा –
-
दोहे का विपरीत।
-
विषम चरण = 11 मात्राएँ, सम चरण = 13 मात्राएँ।
-
चौपाई –
-
सम मात्रिक छंद।
-
प्रत्येक चरण = 16 मात्राएँ।
-
तुक (1–2) और (3–4) चरणों में।
-
रोला –
-
सम मात्रिक छंद।
-
प्रत्येक चरण = 24 मात्राएँ।
-
यति = 11 और 13 पर।
-
मन्दाक्रान्ता –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 17 वर्ण।
-
यति = 4, 6, 7 पर।
-
शिखरिणी –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 17 वर्ण।
-
यति = 6 और 11 पर।
-
वसन्ततिलका –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 14 वर्ण।
-
यति चरण के अंत में।
-
मालिनी –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 15 वर्ण।
-
यति = 8 और 7 पर।
दोहा –
-
अर्धसम मात्रिक छंद।
-
विषम चरण = 13 मात्राएँ, सम चरण = 11 मात्राएँ।
-
यति चरण के अंत में।
-
तुक सामान्यतः सम चरणों में।
सोरठा –
-
दोहे का विपरीत।
-
विषम चरण = 11 मात्राएँ, सम चरण = 13 मात्राएँ।
चौपाई –
-
सम मात्रिक छंद।
-
प्रत्येक चरण = 16 मात्राएँ।
-
तुक (1–2) और (3–4) चरणों में।
रोला –
-
सम मात्रिक छंद।
-
प्रत्येक चरण = 24 मात्राएँ।
-
यति = 11 और 13 पर।
मन्दाक्रान्ता –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 17 वर्ण।
-
यति = 4, 6, 7 पर।
शिखरिणी –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 17 वर्ण।
-
यति = 6 और 11 पर।
वसन्ततिलका –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 14 वर्ण।
-
यति चरण के अंत में।
मालिनी –
-
वर्णिक सम छंद।
-
प्रत्येक चरण = 15 वर्ण।
-
यति = 8 और 7 पर।
FAQs
Q1. छंद की परिभाषा क्या है?
👉 अक्षर, मात्राओं और यति-गति से बंधी पद्य रचना को छंद कहते हैं।
Q2. छंद कितने प्रकार के होते हैं?
👉 छंद तीन मुख्य प्रकार के होते हैं – मात्रिक, वर्णिक और लयात्मक।
Q3. कक्षा 11 में कौन-कौन से छंद पढ़ाए जाते हैं?
👉 दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, मन्दाक्रान्ता, शिखरिणी, वसन्ततिलका और मालिनी।

No comments: