प्रेमघन की छाया-स्मृति | सारांश, लेखक परिचय, शॉर्ट नोट्स
प्रेमघन की छाया-स्मृति | सारांश, लेखक परिचय
परिचय
हिन्दी साहित्य में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का विशेष स्थान है। वे हिन्दी के महान आलोचक, निबंधकार और साहित्य-इतिहासकार माने जाते हैं। उनकी रचना “प्रेमघन की छाया-स्मृति” में बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन का व्यक्तित्व, स्वभाव और उनके जीवन की झलक मिलती है। यह निबंध शुक्ल जी की आत्मीय स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।
लेखक परिचय (आचार्य रामचन्द्र शुक्ल)
- जन्म – 1884 ई., ग्राम अगौना, जिला बस्ती (उत्तर प्रदेश)
- शिक्षा – इंटरमीडिएट तक, तत्पश्चात स्वाध्याय से संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी और बांग्ला का ज्ञान
- पद – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष
- निधन – 1941 ई.
- प्रमुख कृतियाँ – चिन्तामणि, रस मीमांसा, हिन्दी साहित्य का इतिहास, तुलसीदास, सूरदास त्रिवेणी आदि।
प्रेमघन की छाया-स्मृति सारांश
आचार्य शुक्ल का परिचय बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन से मिर्जापुर में हुआ।
- प्रेमघन, भारतेन्दु हरिश्चंद्र के मित्र थे।
- वे पुराने ज़माने के रईस थे – लंबे बाल रखते और होली पर उनके यहाँ खूब नाघरंग होता था।
- उनकी बातचीत व्यंग्य और वक्रता से भरी होती थी।
- वे नागरी को वास्तविक भाषा मानते थे और मिर्जापुर को मीरजापुर लिखते थे।
- "मीर (समुद्र) + जा (पुत्री) + पुर (नगर)" का अर्थ वे लक्ष्मी नगर बताते थे।
👉 यह निबंध प्रेमघन के व्यक्तित्व और जीवनशैली का जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है।
भाषा एवं शैली
- भाषा – परिष्कृत खड़ी बोली, संस्कृत-प्रधान।
- शैली – विवेचनात्मक, तर्कपूर्ण और व्यंग्यात्मक।
परीक्षा हेतु शॉर्ट नोट्स
- शुक्ल जी और प्रेमघन का परिचय – मिर्जापुर
- प्रेमघन – भारतेन्दु के मित्र, व्यंग्यप्रिय, रईसी ठाट-बाट
- नागरी को भाषा मानते थे
- मिर्जापुर को "मीरजापुर" = "लक्ष्मी नगर" कहते थे
निष्कर्ष
“प्रेमघन की छाया-स्मृति” में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने प्रेमघन के व्यक्तित्व, उनके स्वभाव और जीवन की स्मृतियों को रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। यह निबंध हिन्दी साहित्य में आत्मीय संस्मरण की उत्कृष्ट मिसाल है।

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