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कक्षा 12 हिन्दी अनिवार्य पहलवान की ढोलक पाठ सारांश | फणीश्वर नाथ रेणु |

 

पहलवान की ढोलक पाठ सारांश | फणीश्वर नाथ रेणु | कक्षा 12 हिन्दी


लेखक – फणीश्वर नाथ रेणु | विधा – कहानी | मुख्य पात्र – लुट्टन सिंह पहलवान

कक्षा 12 हिन्दी की प्रसिद्ध कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ में लेखक फणीश्वर नाथ रेणु ने ग्रामीण जीवन, महामारी, गरीबी और विपरीत परिस्थितियों में भी साहस के महत्व को उजागर किया है। इस कहानी का मुख्य पात्र लुट्टन सिंह पहलवान है, जिसकी ढोलक गाँव के लोगों के लिए आशा और संजीवनी का प्रतीक बन जाती है।

1. रचना परिचय

  • लेखक: फणीश्वर नाथ रेणु
  • विधा: कहानी
  • मुख्य पात्र: लुट्टन सिंह पहलवान

2. कहानी का प्रसंग

  • गाँव में महामारी, गरीबी और सूखे का भयानक माहौल था।
  • ऐसे समय में रात की खामोशी को तोड़ते हुए पहलवान की ढोलक लोगों को जीवन का साहस देती थी।

3. लुट्टन सिंह का जीवन

  • बचपन में अनाथ हो गया, सास ने पाला।
  • कुश्ती सीखी और ढोलक की थाप से विजय पाई।
  • “राज पहलवान” की उपाधि मिली और 15 साल तक अजेय रहा।
  • राजा की मृत्यु के बाद दरबार से बाहर कर दिया गया।
  • गाँव लौटकर युवाओं और बेटों को पहलवानी सिखाने लगा।

4. महामारी और दुखद स्थिति

  • गाँव में हैजा और मलेरिया फैला, लोग भूख और मृत्यु से जूझ रहे थे।
  • पहलवान की ढोलक लोगों के लिए हिम्मत का स्रोत बनी।
  • उसके दोनों बेटे बीमारी से मर गए, लेकिन पहलवान ने ढोलक बजाते हुए उनका अंतिम संस्कार किया।

5. अंतिम प्रसंग

  • कुछ ही दिनों बाद पहलवान स्वयं भी चल बसा।
  • उसकी अंतिम इच्छा थी –

  • “मुझे पेट के बल चिता पर लिटाना और ढोलक बजाना।”
  • गाँव वालों ने उसकी यह अंतिम इच्छा पूरी की।

6. कहानी का मुख्य संदेश

  • ढोलक = साहस, संघर्ष और जीवन की हिम्मत का प्रतीक।
  • परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को धैर्य और जुझारूपन से उनका सामना करना चाहिए।
  • पहलवान का जीवन त्याग, परिश्रम और अटूट मनोबल का आदर्श है।

निष्कर्ष

फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ हमें यह सिखाती है कि जीवन का असली आधार साहस और संघर्ष है। विपरीत परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति हिम्मत नहीं हारता, वही दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है। लुट्टन सिंह पहलवान का जीवन ग्रामीण समाज के लिए जुझारूपन और आत्मबल का उदाहरण है।

👉 यह ब्लॉग पोस्ट विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

कक्षा 12 हिन्दी अनिवार्य पहलवान की ढोलक पाठ सारांश | फणीश्वर नाथ रेणु | Reviewed by साहित्य संगम on September 04, 2025 Rating: 5

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