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कक्षा 12 हिन्दी अनिवार्य वितान भाग -2 अतीत में दबे पाँव सारांश |

 

अतीत में दबे पाँव सारांश | कक्षा 12 हिन्दी | वितान भाग-2

लेखक – ओम थानवी

कक्षा 12 हिन्दी की पाठ्यपुस्तक वितान भाग-2 में संकलित निबंध “अतीत में दबे पाँव” प्रसिद्ध लेखक ओम थानवी द्वारा लिखा गया है। इसमें लेखक ने अपनी मोहनजोदड़ो यात्रा का वर्णन करते हुए सिंधु घाटी सभ्यता की अद्भुत झलक प्रस्तुत की है। यह पाठ केवल ऐतिहासिक यात्रा-वर्णन ही नहीं, बल्कि अतीत से संवाद कराने वाला साहित्यिक अनुभव भी है।

1. रचना परिचय

  • लेखक: ओम थानवी
  • विधा: यात्रा-वर्णन / निबंध
  • मुख्य विषय: सिंधु घाटी सभ्यता का गौरव, नगर-नियोजन, कला और संस्कृति का परिचय।

2. मुख्य विषय

  • सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो का यात्रा-वर्णन।
  • प्राचीन नगर-नियोजन, संस्कृति और कला का चित्रण।
  • खंडहरों के माध्यम से अतीत से संवाद का अनुभव।

3. महत्वपूर्ण बिंदु

  • मोहनजोदड़ो लगभग 5,000 वर्ष पुराना नगर, 200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला और लगभग 85,000 की आबादी वाला था।
  • नगर-नियोजन में सीधी सड़कें, ग्रिड प्लान, पक्की ईंटों के घर, ढकी हुई नालियाँ और अद्भुत जल-प्रबंधन व्यवस्था थी।
  • महाकुंड (ग्रेट बाथ): अनुष्ठानिक स्नान का केंद्र और श्रेष्ठ वास्तुकला का उदाहरण।
  • बौद्ध स्तूप और गढ़ क्षेत्र: सत्ता और धर्म के केंद्र।
  • बस्ती का वर्ग विभाजन – उच्च वर्ग, कामगार और निम्न वर्ग की बस्तियाँ।
  • खुदाई से मिली वस्तुएँ – नर्तकी की मूर्ति, याजक-नरेश की प्रतिमा, ताँबे-बाँस के औज़ार, मिट्टी के खिलौने, गेहूँ-कपास के प्रमाण, मनके, सुइयाँ आदि।
  • हड़प्पा संस्कृति में न तो भव्य राजप्रसाद मिले और न ही मंदिर या सैन्य शक्ति के प्रमाण – समाज अनुशासन पर आधारित था।
  • यह सभ्यता तकनीक से अधिक कला-सिद्ध और सौंदर्य-बोध प्रधान थी।

4. विशेषताएँ

  • जल-संस्कृति: कुएँ, कुंड, नालियाँ, स्नानागार।
  • कला व शिल्प: मूर्तिकला, चित्रित मृद्भांड, मुहरें, आभूषण।
  • कृषि व पशुपालन: गेहूँ, जौ, सरसों, कपास, ज्वार-बाजरा आदि की खेती।
  • शांतिप्रिय समाज: हथियार नहीं मिले, पर सामाजिक अनुशासन विद्यमान था।

5. संदेश / निष्कर्ष

  • मोहनजोदड़ो केवल खंडहर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास, नगर-नियोजन और सांस्कृतिक सौंदर्य-बोध का जीवंत प्रतीक है।
  • भले ही खुदाई बंद हो गई है और कई रहस्य अभी भी दबे हैं, लेकिन यह स्थल आज भी हमें अतीत से संवाद करने का अवसर देता है।

👉 यह निबंध छात्रों के लिए इतिहास, संस्कृति और साहित्य को जोड़ने वाला अद्भुत पाठ है।
कक्षा 12 हिन्दी अनिवार्य वितान भाग -2 अतीत में दबे पाँव सारांश | Reviewed by साहित्य संगम on September 04, 2025 Rating: 5

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