कक्षा 11 हिन्दी अनिवार्य आरोह |जामुन का पेड़ कृश्नचंदर
🌳 जामुन का पेड़ पाठ सार
✍️ परिचय
“जामुन का पेड़” एक प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कथा है, जिसके लेखक श्री कृश्नचंदर जी हैं। इस कहानी में लेखक ने सरकारी दफ्तरों की अकर्मण्यता, संवेदनहीनता और गैरजिम्मेदार रवैये पर तीखा व्यंग्य किया है।
📖 कथानक संक्षेप (Summary)
- आंधी-तूफान में सचिवालय के लॉन में एक जामुन का पेड़ गिर जाता है और उसके नीचे एक आदमी दब जाता है।
- लोग पेड़ की जामुन की मिठास और अपने-अपने अनुभवों पर चर्चा करते हैं, लेकिन दबे हुए आदमी की सुध नहीं लेते।
- पेड़ हटाने का मामला क्लर्क → सुपरिटेंडेंट → अंडर सेक्रेटरी → डिप्टी सेक्रेटरी → ज्वाइंट सेक्रेटरी → चीफ सेक्रेटरी → मंत्री तक पहुँचता है।
- हर विभाग जिम्मेदारी टालता रहता है – कभी कृषि, उद्यान, मेडिकल, सांस्कृतिक, वन, तो कभी विदेश विभाग तक।
- अंततः प्रधानमंत्री आदेश देते हैं कि पेड़ हटाया जाए, लेकिन तब तक दबे हुए आदमी की मौत हो जाती है।
🎯 मुख्य बिंदु (Short Notes)
- लेखक – कृश्नचंदर
- रचना का प्रकार – हास्य-व्यंग्य कथा
- मुख्य विषय – सरकारी तंत्र की लापरवाही और संवेदनहीनता
- व्यंग्य का केंद्र – विभागीय टालमटोल, फाइलों का चक्कर और नौकरशाही की जटिलता
- संदेश – मानव जीवन से बढ़कर कोई भी औपचारिकता नहीं हो सकती
🌟 निष्कर्ष
“जामुन का पेड़” व्यंग्य कथा हमें यह सिखाती है कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और फाइलों का खेल इंसान की जान से बड़ा हो जाता है। कृश्नचंदर जी ने इस हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज और शासन तंत्र की सच्चाई को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
कक्षा 11 हिन्दी अनिवार्य आरोह |जामुन का पेड़ कृश्नचंदर
Reviewed by साहित्य संगम
on
September 04, 2025
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