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बोली, विभाषा और भाषा

 

बोली, विभाषा और भाषा

भाषाविभाषा (उपभाषा) और बोली – ये तीनों अभिव्यक्ति के माध्यम हैं, लेकिन इनका प्रयोग, क्षेत्र और विकास भिन्न होते हैं।

इनमें मूलभूत अंतर इनके प्रसार क्षेत्र, साहित्यिक योगदान, और व्यवहारिक प्रयोग पर आधारित होता है।

1️ बोली (Dialect)

🔹 परिभाषा: बोली भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है, जो विशेष ग्राम या क्षेत्र में प्रचलित रहती है।
🔹 यह मुख्य रूप से बोलचाल में प्रयुक्त होती है और इसका कोई मानकीकृत रूप नहीं होता।
🔹 इसमें स्थानीय शब्दों और देशज उच्चारण की प्रमुखता होती है।

📌 विशेषताएँ:

सीमित क्षेत्र में प्रयुक्त होती है।

लिपिबद्ध साहित्य लगभग नहीं होता।

व्याकरण असंगठित या सीमित होता है।

उदाहरण: कन्नौजीकुमाऊँनीमेवाती।

2️ विभाषा / उपभाषा (Sub-language)

🔹 परिभाषा: विभाषा बोली की तुलना में अधिक व्यापक होती है और एक प्रांत या उप-प्रांत में प्रचलित रहती है।
🔹 इसे उपभाषा भी कहा जाता है।

📌 विशेषताएँ:

एक विभाषा में कई बोलियाँ हो सकती हैं।

इसमें कुछ साहित्यिक रचनाएँ भी पाई जाती हैं।

व्याकरणिक ढाँचा आंशिक रूप से विकसित होता है।

उदाहरण: ब्रजअवध।

3️ भाषा (Language)

🔹 परिभाषा: भाषा बोली और विभाषा की विकसित अवस्था है, जिसे परिनिष्ठित या मानक भाषा कहा जाता है।
🔹 इसका क्षेत्र व्यापक होता है और यह राजकार्य, शिक्षा और साहित्य में प्रयुक्त होती है।

📌 विशेषताएँ:

सुव्यवस्थित व्याकरण और लिपि होती है।

साहित्य का भंडार प्रचुर मात्रा में होता है।

सामाजिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक रूप में मान्यता प्राप्त।

उदाहरण: हिन्दीअंग्रेज़ीसंस्कृत।

बोली, विभाषा और भाषा Reviewed by साहित्य संगम on August 28, 2025 Rating: 5

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