भाषा और बोली
भाषा और बोली
- भाषा:- भाषा का क्षेत्र व्यापक
- भाषा की लिपि निर्धारित होती है
- भाषा में साहित्य सृजन
- भाषा के अंतर्गत कई उपभाषाएँ
बोली
:- बोली को भाषा का स्थानीय या क्षेत्रीय रूप भी कहा जा सकता है
|
- बोली
भाषा का अल्प विकसित या अर्ध विकसित रूप है |
- जैसे
–मारवाड़ी ,मेवाड़ी ,शेखावाटी
- एक छोटे/सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली
भाषा
- बोली
अधिकांश लोकगीतों में मोखिक स्तर पर होती
है
- बोली की कोई लिपि नहीं होती
- उपभाषा/विभाषा:- भाषा व्
बोली के बीच की स्थिति को
- उपभाषा :- भाषा का छोटा रूप
हिंदी की बोलियाँ
हिंदी की बोलियों को छह वर्गों में विभाजित किया जा
सकता है
- पश्चिमी हिंदी : – ब्रज, खड़ी बोली, हरियाणवी (बांगरू) बुंदेली और कन्नौजी।
- पूर्वी हिंदी : – अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी।
- राजस्थानी : – मेवाती, मारवाड़ी, हाड़ोती, मेवाड़ी।
- बिहारी : – मैथिली, मगधी, भोजपुरी।
- पहाड़ी : – गढ़वाली, कुमाऊँगी, मैडियाली।
- दक्खिनी : – बीजापुर, गोलकुंडा के क्षेत्र।
भाषा और बोली
Reviewed by साहित्य संगम
on
August 28, 2025
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